SDM के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, बच्चों के पार्क की जमीन पर बनी अवैध कॉलोनी पर सवाल

खैरागढ़ के सिविल लाइन क्षेत्र में बच्चों के पार्क और मेंटेनेंस खसरा की जमीन पर बनी कथित अवैध कॉलोनी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एसडीएम जांच और कलेक्टर कार्यालय के निर्देशों के बावजूद नगर पालिका की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासनिक निष्क्रियता और रसूखदारों के दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

May 27, 2026 - 15:35
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SDM के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं, बच्चों के पार्क की जमीन पर बनी अवैध कॉलोनी पर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. खैरागढ़। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित प्लॉट नंबर 114 और 115 की जमीन पर बनी कथित अवैध कॉलोनी का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सवालों के केंद्र में आ गया है। सरकारी जांच में अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने और कलेक्टर कार्यालय द्वारा कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद नगर पालिका की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

जानकारी के अनुसार संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में एडवर्ड चिल्ड्रन पार्क और बाड़ी के रूप में दर्ज रही है। आजादी से पहले यह क्षेत्र “अल्फ्रेड पार्क” के नाम से जाना जाता था। बाद में यहां राजा लालबहादुर सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई थी। समय के साथ यह जमीन टुकड़ों में बंटती चली गई और अब यहां कई मकान, कॉम्प्लेक्स तथा निर्माणाधीन भवन खड़े हो चुके हैं।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक लगभग एक लाख वर्गफीट से अधिक जमीन को करीब 22 हिस्सों में विभाजित किया गया। इनमें से 17 लोगों के नाम पर जमीन दर्ज होने की बात सामने आई है। कई हिस्सों की दोबारा बिक्री भी की गई। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि इस जमीन के लिए किसी प्रकार का वैध ले-आउट स्वीकृत नहीं किया गया था। यानी कॉलोनी विकसित करने की अनुमति ही नहीं थी।

इसके बावजूद वर्षों तक जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और निर्माण कार्य जारी रहे। मामले की जांच के बाद एसडीएम कार्यालय ने रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय को भेजी। इसके बाद नजूल शाखा ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र जारी कर छत्तीसगढ़ नगर पालिका कॉलोनाइजर नियमों के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। लेकिन इन आदेशों के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर नगर पालिका कार्रवाई करने से बच क्यों रही है। जब विभागीय दस्तावेजों में अवैध प्लाटिंग की पुष्टि हो चुकी है, तब न तो अवैध निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किए गए और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया। इस स्थिति ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहर में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस पूरे मामले में किसी प्रभावशाली समूह या रसूखदार लोगों का दबाव काम कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि बच्चों के पार्क और मेंटेनेंस खसरा की जमीन पर बनी कॉलोनी पर भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है, तो आम सरकारी जमीनों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और भू-कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। खैरागढ़ का यह मामला अब केवल जमीन विवाद नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और सरकारी आदेशों के पालन पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर सामने आया है।