झीरम घाटी नरसंहार से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर चर्चा की मांग, उपमुख्यमंत्री से मिलने का आग्रह
झीरम घाटी नरसंहार से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आने के बाद एक आवेदक ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर कानूनी चर्चा की मांग की है। पत्र में आयोग की जांच, शहीद नेताओं और न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह,रायपुर | छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में शामिल झीरम घाटी वृहद् नरसंहार एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2013 में सुकमा जिले के दरभा घाटी क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी की “परिवर्तन यात्रा” के दौरान नक्सलियों द्वारा किए गए भीषण हमले में देश और प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं, पुलिसकर्मियों एवं निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
इस नरसंहार में पं. विद्याचरण शुक्ल, नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार और योगेन्द्र शर्मा जैसे वरिष्ठ और जनप्रिय नेताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। घटना के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा न्यायिक जांच के उद्देश्य से “झीरम घाटी वृहद् नरसंहार जाँच आयोग” का गठन किया गया था, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने की।
अब इस मामले में एक बार फिर नई पहल सामने आई है। आयोग से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और जानकारियाँ सामने आने के बाद, एक आवेदक ने छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा को औपचारिक पत्र लिखकर व्यक्तिगत मुलाकात की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि ये दस्तावेज अत्यंत संवेदनशील और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, जिनका सत्यापन और विधिसम्मत परीक्षण आवश्यक है।
आवेदक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह विषय किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं, बल्कि न्याय, सत्य और शहीदों के सम्मान से संबंधित है। उन्होंने आग्रह किया है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मामले पर गंभीर और सार्थक चर्चा की जाए, ताकि झीरम घाटी नरसंहार के पीड़ितों को वास्तविक न्याय मिल सके।
इस पत्र के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया है कि झीरम घाटी जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता न केवल लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि शासन स्तर पर इस मांग पर क्या कदम उठाए जाते हैं।