पखांजूर में किसानों के समर्थन में कांग्रेस का एक दिवसीय उपवास, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर दी आंदोलन की चेतावनी
पखांजूर में किसानों की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA. श्रीदाम डाली, कांकेर | पखांजूर में किसानों की समस्याओं और उनकी लंबित मांगों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की है। मंगलवार को ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, मंडल कांग्रेस कमेटी, महिला कांग्रेस कमेटी एवं युवा कांग्रेस के संयुक्त बैनर तले पखांजूर लैंप्स के सामने एक दिवसीय किसान उपवास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान एवं कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर की गई, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने सत्याग्रह के माध्यम से किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। नेताओं ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन आज वही किसान अपनी बुनियादी मांगों को लेकर परेशान हैं।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों से जुड़ी पांच सूत्रीय मांगों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर छूटे हुए किसानों की पहचान कर उनका पंजीयन नहीं किया गया और सभी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो कांग्रेस पार्टी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगी।
सत्याग्रह के दौरान कांकेर जिला की पूर्व अध्यक्ष सुभद्रा सलाम सहित अनेक वरिष्ठ और स्थानीय कांग्रेस नेता उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि शासन-प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहा है, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम में किसानों की समस्याओं जैसे पंजीयन, योजनाओं का लाभ न मिलना और प्रशासनिक लापरवाही को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। कांग्रेस नेताओं ने भरोसा दिलाया कि पार्टी किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करती रहेगी।
एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह किसानों के साथ खड़ी है और उनकी मांगों को लेकर किसी भी हद तक जाने को तैयार है। कार्यक्रम में क्षेत्र के किसानों की बड़ी भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसान अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हैं और संघर्ष के लिए तैयार हैं।