ग्रामीणों के अनुसार, तालाब में बनाई जा रही रिटर्निंग वॉल का निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि दीवार की गहराई और मजबूती स्टीमेट के अनुसार नहीं है, जिससे भविष्य में इसके ढहने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि निर्माण में उपयोग किए जा रहे सीमेंट और अन्य सामग्री की मात्रा में भारी कटौती की जा रही है, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। सामान्यतः किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में लागत, कार्य अवधि और एजेंसी की जानकारी प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां यह नियम पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर सूचना को छिपाया जा रहा है, ताकि अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा सके।
शिकायतकर्ता शत्रुहन कुमार कोसले सहित अन्य ग्रामीणों ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पिछले वर्ष भी इसी तालाब में रिटर्निंग वॉल निर्माण के दौरान अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। बावजूद इसके प्रशासन ने उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे संबंधित लोगों के हौसले बुलंद हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में जो निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह जल्दबाजी में और बिना उचित निगरानी के किया जा रहा है। उन्होंने इसे “आनन-फानन में किया जा रहा कार्य” बताते हुए इसे भ्रष्टाचार का माध्यम करार दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ भविष्य में दुर्घटना की संभावना भी बढ़ सकती है।
इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही, जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस कार्य के भुगतान पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
ग्रामीणों ने अपने शिकायत पत्र की प्रतिलिपि जनपद पंचायत बोड़ला, संबंधित अनुविभागीय अधिकारी और स्थानीय पत्रकारों को भी भेजी है, ताकि मामले में पारदर्शिता बनी रहे और जल्द से जल्द कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है। यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है। फिलहाल, राजानवागांव के ग्रामीण न्याय की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रहे हैं।