जमुनिया जेठू में प्राकृतिक खेती पाठशाला आयोजित, किसानों को बताए गए जैविक खेती के लाभ

परासिया के ग्राम जमुनिया जेठू में कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, सरकारी योजनाओं और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर स्वस्थ एवं टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

Jun 21, 2026 - 16:44
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जमुनिया जेठू में प्राकृतिक खेती पाठशाला आयोजित, किसानों को बताए गए जैविक खेती के लाभ

UNITED NEWS OF ASIA. वीरेंद्र यादव, छिंदवाड़ा l भारत सरकार के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित विशेष अभियान के अंतर्गत परासिया विकासखंड के ग्राम जमुनिया जेठू में प्राकृतिक खेती पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कृषि विभाग परासिया द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराना था।

पाठशाला का आयोजन अनुविभागीय अधिकारी शुभम यादव के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती की नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और प्राकृतिक कृषि के लाभों के बारे में विस्तार से बताया।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एस. पी. डेहरिया ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शासन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रहा है, जिनका लाभ लेकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।

वहीं ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर अमित बघेल ने किसानों को प्राकृतिक खेती की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बढ़ रही अनेक बीमारियों के पीछे पोषक तत्वों की कमी और रासायनिक पदार्थों का अत्यधिक उपयोग एक प्रमुख कारण है।

किसानों को संबोधित करते हुए बताया गया कि यदि स्वस्थ जीवन और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना है तो धीरे-धीरे रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना आवश्यक है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज, दालें, फल और सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी होती हैं। इसके साथ ही खेती की लागत भी कम होती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। इसके अलावा मिट्टी की जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन संभव हो पाता है। प्राकृतिक खेती से खेतों में मौजूद सूक्ष्म जीवों और जैव विविधता का संरक्षण भी होता है, जो कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला के दौरान जी. एस. वाडिवा ने किसानों को ई-विकास प्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल माध्यमों से कृषि सेवाओं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के तरीकों को समझाया। किसानों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से कृषि संबंधी जानकारी और सुविधाएं अधिक आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं।

पाठशाला में ग्राम पंचायत के सरपंच, वरिष्ठ नागरिकों, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों तथा ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। किसानों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए और इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह आयोजन किसानों के बीच प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कृषि विभाग द्वारा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को सतत एवं लाभकारी खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा।