अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान प्रणाली व लोकतंत्र पर शोधों की प्रभावशाली प्रस्तुति

रायपुर के जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 100 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। भारतीय ज्ञान प्रणाली, लोकतंत्र, डिजिटल मानविकी, आयुर्वेद, न्यायशास्त्र और विज्ञान विषयों पर देश–विदेश के विद्वानों ने महत्त्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।

Nov 29, 2025 - 13:52
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अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान प्रणाली व लोकतंत्र पर शोधों की प्रभावशाली प्रस्तुति

 UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर — शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में आयोजित त्रि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “भारत में लोकतंत्र के 75 वर्ष एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली: बहुविषयी दृष्टिकोण” का दूसरा दिन अकादमिक गतिविधियों और शोध प्रस्तुतियों से अत्यंत समृद्ध रहा। आयोजन सचिव डॉ. विनीता अग्रवाल ने बताया कि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. तपेश चंद्र गुप्ता के मार्गदर्शन में सभी सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जिनमें देश–विदेश से आए अनेक विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।

पहले सत्र में श्रीलंका के विख्यात विद्वान डॉ. एन. राजेश्वरन ने आधुनिक लेखांकन में ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वचालन तकनीकों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय पारंपरिक लेखा प्रणाली अपनी सुदृढ़ संरचना के कारण आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सकती है।

इसके बाद प्रो. चित्तरंजन कर ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के दार्शनिक, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलुओं—वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, गणित और खगोल विज्ञान—की प्रासंगिकता को समकालीन चुनौतियों से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया।

दोपहर सत्र में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नया रायपुर) के निदेशक तथा ख्याति प्राप्त कंप्यूटर वैज्ञानिक प्रो. ओ. पी. व्यास ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली और डिजिटल मानविकी” पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि प्राचीन ग्रंथों का डिजिटलीकरण, संस्कृत का संगणकीय अध्ययन, डिजिटल अभिलेखागार और एआई-आधारित अनुवाद परियोजनाएँ भारतीय ज्ञान के वैश्विक प्रसार में क्रांतिकारी योगदान दे रही हैं।

संगोष्ठी के समानांतर तकनीकी सत्रों में कला, विज्ञान, वाणिज्य और विधि संकायों से 100 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें न्यायशास्त्र, प्राचीन अर्थव्यवस्था, सौंदर्यशास्त्र, गणित, रसायन, खगोल, पर्यावरण, आयुर्वेद और सार्वजनिक नीति जैसे विविध विषयों पर शोधार्थियों ने अपने निष्कर्ष विस्तार से रखे। इन सत्रों की अध्यक्षता विभिन्न प्रतिष्ठित विद्वानों और वरिष्ठ प्राध्यापकों ने की।

प्लेनरी सत्र में सामाजिक कार्यकर्ता श्री विवेक सक्सेना ने “भारतीय ज्ञान प्रणाली और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020” विषय पर कहा कि यह नीति भारतीय शिक्षा को उसकी जड़ों से जोड़ने तथा विद्यार्थियों में समग्र विकास का दृष्टिकोण विकसित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाती है।

कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य प्रो. तपेश चंद्र गुप्ता ने देश–विदेश से आए विद्वानों, शोधार्थियों, आयोजन समिति और मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली का यह पुनर्जागरण भारत को ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने समापन दिवस की रूपरेखा भी साझा की।