NH-343 औघड़पारा चौक से सरकारी हैंडपंप गायब, निजी समरसेबल लगाने का आरोप
बलरामपुर जिले के NH-343 स्थित औघड़पारा चौक में राहगीरों और ग्रामीणों के लिए लगाए गए शासकीय हैंडपंप को हटाकर निजी समरसेबल पंप लगाए जाने का आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद पीएचई विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 स्थित जमान्तपुर के औघड़पारा चौक में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि राहगीरों और ग्रामीणों की सुविधा के लिए लगाए गए शासकीय हैंडपंप को हटाकर वहां निजी समरसेबल पंप स्थापित कर दिया गया है। इस घटना के बाद क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया है और लोग भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार औघड़पारा चौक एक व्यस्त मार्ग पर स्थित है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण और राहगीर गुजरते हैं। लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा यहां एक शासकीय हैंडपंप स्थापित किया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ समय पूर्व एक व्यक्ति ने उक्त हैंडपंप को उखाड़कर वहां निजी समरसेबल पंप लगा दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप हटने के बाद आम लोगों के लिए पानी की उपलब्धता लगभग समाप्त हो गई है। आरोप है कि जिस बोरिंग में पहले शासकीय हैंडपंप लगा था, उसी में निजी समरसेबल डालकर पानी का उपयोग व्यक्तिगत कृषि कार्यों और सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे राहगीरों और आसपास के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी के मौसम में यह हैंडपंप यात्रियों और ग्रामीणों के लिए राहत का प्रमुख साधन था। अब पानी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई राहगीरों ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताई है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि मामले की शिकायत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भी दी गई है। शिकायत में शासकीय संपत्ति को हटाने और सार्वजनिक उपयोग के जल स्रोत पर निजी कब्जे की जांच की मांग की गई है। हालांकि शिकायत किए जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी हैंडपंप को वास्तव में हटाया गया है तो इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही सार्वजनिक उपयोग के लिए तत्काल पेयजल व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए ताकि राहगीरों और स्थानीय निवासियों को राहत मिल सके।
अब लोगों की नजर प्रशासन और पीएचई विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर शासकीय हैंडपंप को पुनः स्थापित किया जाए तथा सार्वजनिक जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।