यह कार्यक्रम गरियाबंद जिले के अंदरूनी और संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों के लिए विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया गया। शिविर के दौरान बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचे। प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि गांव के अधिकांश ग्रामीण खून की कमी यानी एनीमिया से पीड़ित हैं।
सीआरपीएफ की चिकित्सकीय टीम द्वारा सभी ग्रामीणों की आवश्यक जांच कर उन्हें तुरंत दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही ग्रामीणों को खानपान, स्वच्छता और दैनिक जीवन से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सुझाव भी दिए गए, ताकि भविष्य में एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव किया जा सके।
इस स्वास्थ्य शिविर में सीआरपीएफ की ओर से तैनात चिकित्सकीय अधिकारी तपस्विनी ने बताया कि ग्रामीणों में पोषण की कमी और नियमित स्वास्थ्य जांच न होने के कारण एनीमिया की समस्या अधिक पाई गई है। उन्होंने ग्रामीणों को आयरन युक्त भोजन, हरी सब्जियों और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान सीआरपीएफ जवानों ने केवल चिकित्सा सहायता ही नहीं दी, बल्कि सभी वर्गों के ग्रामीणों को उनकी दिनचर्या में उपयोग आने वाली आवश्यक सामग्री भी भेंट की। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए वितरण सामग्री पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। जवानों की इस पहल ने गांव में एक सकारात्मक माहौल तैयार किया।
कार्यक्रम के संबंध में सीआरपीएफ 211 बटालियन के कंपनी कमांडर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनकल्याण कार्यक्रम एंटी नक्सल ऑपरेशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुरक्षा बलों का उद्देश्य केवल क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों के साथ विश्वास और संवाद को मजबूत करना भी है।
उन्होंने कहा कि जब ग्रामीणों को यह भरोसा होता है कि सुरक्षा बल उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं, तब नक्सल प्रभावित इलाकों में सकारात्मक बदलाव तेजी से दिखाई देने लगता है। इसी रणनीति के तहत सीआरपीएफ समय-समय पर सिविक एक्शन कार्यक्रम आयोजित करती रहती है।
गरियाबंद जिले के अंदरूनी इलाकों में सीआरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे ऐसे जनकल्याण अभियानों से ग्रामीणों और सुरक्षाबलों के बीच दूरी कम हो रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक छवि के जरिए अपनी पैठ मजबूत करना भी एंटी नक्सल अभियान की एक अहम रणनीति मानी जाती है।
पायलीखण्ड गांव में आयोजित यह सिविक एक्शन कार्यक्रम न केवल ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रहा, बल्कि सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी भी बनकर सामने आया।