लोहारी-लिटीपारा सड़क निर्माण में बड़ा घोटाला? करोड़ों खर्च के बाद भी सड़क उखड़ी, अधिकारियों पर सवाल

गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी लोहारी-लिटीपारा सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। करोड़ों की लागत के बावजूद सड़क में गड्ढे उभरने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए हैं।

Apr 6, 2026 - 19:12
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लोहारी-लिटीपारा सड़क निर्माण में बड़ा घोटाला? करोड़ों खर्च के बाद भी सड़क उखड़ी, अधिकारियों पर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद। गरियाबंद जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही लोहारी से लिटीपारा तक की सड़क पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। लगभग 9.9 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण और संधारण कार्य पर करीब 1 करोड़ 34 लाख 41 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्थिति इस भारी निवेश पर सवाल खड़े कर रही है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सड़क का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है और सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है। नई सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि सड़क की स्थिति इतनी खराब है, तो यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसके कारण सड़क जल्द ही खराब हो गई।

इस पूरे मामले में मॉनिटरिंग अधिकारी एसडीओ विनय हिरवानी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं के पास है, लेकिन इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी के बावजूद उनकी ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उनकी चुप्पी को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि कहीं न कहीं अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत हो सकती है, जिसके कारण इस तरह का घटिया निर्माण कार्य बिना किसी रोक-टोक के जारी है। यदि निगरानी करने वाले अधिकारी ही सक्रिय नहीं होंगे, तो इस तरह की गड़बड़ियों को रोकना मुश्किल हो जाएगा।

यह मामला न केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। विकास कार्यों के नाम पर यदि इस तरह से सरकारी धन का दुरुपयोग होता रहेगा, तो आम जनता का विश्वास प्रशासन से उठ सकता है।

अब जरूरत है कि उच्च अधिकारी इस मामले का गंभीरता से संज्ञान लें और स्वतंत्र जांच कराएं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार को रोका जा सके।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें सुरक्षित तथा टिकाऊ सड़क सुविधा मिल सकेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करता है।