दुर्ग ग्रामीण में 40 बोर खनन कार्यों में अनियमितता का आरोप, 16 लाख रुपये की गड़बड़ी की शिकायत

दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में स्वीकृत 40 बोर खनन एवं हैंडपंप स्थापना कार्यों में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से तकनीकी एवं वित्तीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

Jun 12, 2026 - 10:54
Jun 12, 2026 - 12:07
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दुर्ग ग्रामीण में 40 बोर खनन कार्यों में अनियमितता का आरोप, 16 लाख रुपये की गड़बड़ी की शिकायत

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में बोर खनन एवं हैंडपंप स्थापना कार्यों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण के माध्यम से स्वीकृत लगभग 40 कार्यों में कथित अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर शिकायतकर्ता और आरटीआई कार्यकर्ता उपेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर दुर्ग और संबंधित विभागीय अधिकारियों को शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार क्षेत्र में स्वीकृत प्रत्येक बोर खनन एवं हैंडपंप स्थापना कार्य के लिए लगभग 1.50 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई थी। इस आधार पर कुल 40 कार्यों के लिए लगभग 60 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि स्वीकृत प्राक्कलन में प्रत्येक कार्य के अंतर्गत 5 एचपी मोटर पंप स्थापना और अन्य आवश्यक संसाधनों का प्रावधान किया गया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर केवल हैंडपंप लगाकर कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया

शिकायतकर्ता का दावा है कि कई स्थानों पर मोटर पंप और अन्य सामग्री स्थापित नहीं की गई, जबकि इनके लिए बजट का प्रावधान मौजूद था। ऐसे में शासकीय राशि के उपयोग और कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि यदि स्वीकृत योजना के अनुसार कार्य नहीं हुए हैं, तो यह वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला हो सकता है।

उपेन्द्र कुमार ने आरोप लगाया है कि कई कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किए गए हैं और निर्माण गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने प्रारंभिक स्तर पर करीब 16 लाख रुपये की संभावित वित्तीय अनियमितता होने की आशंका जताई है। हालांकि इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायत में मांग की गई है कि सभी स्वीकृत कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए तथा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जाए। इसके अलावा संबंधित दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की वित्तीय जांच भी कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर उचित कार्रवाई की जा सके।

शिकायतकर्ता ने यह भी आग्रह किया है कि जांच पूरी होने तक शेष भुगतान पर रोक लगाई जाए। साथ ही जिन कार्यों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, उनकी भी पुनः समीक्षा की जाए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, एजेंसी या ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शासकीय राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।

यह मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के संज्ञान में पहुंच चुका है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।