सहायक संचालक, मछलीपालन विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम-1972 की धारा 3(2) के तहत यह प्रतिबंध लागू रहेगा। इस दौरान जिले के अधिकांश नदी, नाले, जलाशय एवं प्राकृतिक जल स्रोतों में मछली पकड़ने की अनुमति नहीं होगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानसून के समय मछलियों का प्रजनन काल होता है, ऐसे में अनियंत्रित मत्स्याखेट से उनकी संख्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इस अवधि में मछली पकड़ने पर रोक लगाना पर्यावरणीय संतुलन और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम है।
हालांकि कुछ गतिविधियों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। ऐसे छोटे तालाब और जल स्रोत जिनका किसी नदी या नाले से कोई संबंध नहीं है, उनमें मत्स्याखेट पर यह रोक लागू नहीं होगी। इसी प्रकार जलाशयों में संचालित केज कल्चर गतिविधियों को भी इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) अधिनियम-2025 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम-1948 की धारा 5 के तहत दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन करने पर अधिकतम 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
मत्स्य पालन विभाग ने सभी मत्स्य व्यवसायियों और स्थानीय मछुआरों से अपील की है कि वे निर्धारित अवधि का पालन करें और जलीय संसाधनों के संरक्षण में सहयोग दें। विभाग ने कहा है कि यह प्रतिबंध केवल कानून व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए मछली संसाधनों को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है।
प्रशासन ने जिले के सभी संबंधित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इस आदेश की जानकारी पहुंच सके और कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन न करे।