बहुमंजिला भवन स्वामित्व कानून के 50 वर्षों बाद भी अनुपालन नहीं, आम आदमी पार्टी ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ने रायपुर में प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि बहुमंजिला भवन स्वामित्व अधिनियम 1976 के 50 वर्ष बाद भी राज्य में इसका प्रभावी अनुपालन नहीं हो पाया है। नेताओं ने सहकारी समितियों के गठन और फ्लैट स्वामित्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और रेरा की भूमिका पर भी टिप्पणी की।

Jun 12, 2026 - 16:19
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बहुमंजिला भवन स्वामित्व कानून के 50 वर्षों बाद भी अनुपालन नहीं, आम आदमी पार्टी ने उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में 12 जून 2026 को आयोजित एक प्रेसवार्ता में आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के नेताओं ने बहुमंजिला भवन स्वामित्व अधिनियम 1976 के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस कानून को बने 50 वर्ष और छत्तीसगढ़ राज्य को अस्तित्व में आए 26 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य में अब तक इसका प्रभावी अनुपालन नहीं हो पाया है।

प्रेसवार्ता में मेहरबान सिंग, विजय झा और के. ज्योति सहित अन्य नेताओं ने कहा कि प्रदेश में बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट और दुकानों की खरीद करने वाले लोगों के स्वामित्व अधिकारों को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं है। उनका आरोप था कि जिन जमीनों पर अपार्टमेंट या कॉम्पलेक्स बने हैं, वे आज भी बिल्डरों के नाम पर दर्ज हैं, जबकि खरीदार केवल फ्लैट या दुकान के आधार पर स्वामित्व का दावा करते हैं।

नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि किसी प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना में भवन क्षतिग्रस्त होता है, तो ऐसी स्थिति में निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केवल फ्लैट की रजिस्ट्री को पूर्ण स्वामित्व माना जा सकता है, जबकि भूमि का मालिकाना हक बिल्डर के पास ही रहता है।

प्रेसवार्ता में सहकारी समितियों के गठन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठाए गए। नेताओं का कहना था कि प्रदेश में सहकारी संस्थाएं बनाने में लगातार बाधाएं आती रही हैं, जिससे फ्लैट क्रेताओं को सामूहिक अधिकार प्राप्त करने में कठिनाई होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारी व्यवस्था के अभाव में बिल्डरों द्वारा उपभोक्ताओं का शोषण होने की स्थिति बनी रहती है।

बिलासपुर के सी.जी. प्लाजा कॉम्प्लेक्स का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहां व्यवसायिक उपविधियों के अभाव का हवाला देकर सहकारी समिति गठन से इनकार किया गया। इसी तरह अन्य मामलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग कारणों से समितियों का गठन लंबित है।

दुर्ग और राजनांदगांव स्थित छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अपार्टमेंट और कॉम्प्लेक्स से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए नेताओं ने कहा कि कई स्थानों पर सहकारी समितियों के गठन के आवेदन वर्षों से लंबित हैं। उनका कहना था कि इस स्थिति के कारण उपभोक्ताओं के सामूहिक अधिकारों का विकास नहीं हो पा रहा है।

आम आदमी पार्टी ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में रेरा द्वारा की गई कार्रवाई और नोटिस केवल औपचारिकता प्रतीत होते हैं और जमीन पर वास्तविक सुधार नहीं दिखता।

पार्टी नेताओं ने राज्यपाल को इस संबंध में पत्र भेजे जाने की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में फ्लैट खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा और सहकारी समितियों के गठन में आ रही बाधाओं का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। प्रेसवार्ता का समापन करते हुए मिहिर कुर्मी, प्रदेश मीडिया प्रभारी, ने कहा कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आम जनता के हित प्रभावित होते रहेंगे।