बड़े बेड़मा में खेती-किसानी के लिए बने नए नियम, मुर्गा सेवन पर 10 हजार जुर्माना

दंतेवाड़ा जिले के बड़े बेड़मा गांव में खेती-किसानी को व्यवस्थित करने के लिए ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। बैठक में जुताई और मजदूरी की दर तय करने के साथ बाजार से लाए गए बायलर, चेंडी और हाईब्रिड मुर्गे के सेवन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का भी फैसला किया गया।

Jul 14, 2026 - 11:17
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बड़े बेड़मा में खेती-किसानी के लिए बने नए नियम, मुर्गा सेवन पर 10 हजार जुर्माना

UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l दंतेवाड़ा जिले के बड़े बेड़मा गांव में बरसात के मौसम और खरीफ फसल की तैयारी को देखते हुए ग्रामीणों की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में गांव के किसानों और ग्रामीणों ने खेती-किसानी से जुड़े कार्यों को सुव्यवस्थित करने तथा सामाजिक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए। ग्रामीणों का मानना है कि सामूहिक सहमति से बनाए गए इन नियमों से कृषि कार्य समय पर पूरे होंगे और गांव में एकरूपता बनी रहेगी।

बैठक में सबसे पहले खेती से जुड़े कार्यों के लिए दरें निर्धारित की गईं। निर्णय के अनुसार ट्रैक्टर से खेत की जुताई का शुल्क 1200 रुपये प्रति घंटा तय किया गया है। वहीं पारंपरिक बैलों से जुताई की दर 200 रुपये प्रति घंटा निर्धारित की गई। इसके अलावा खेतों में खरपतवार निकालने और धान की खटाई जैसे कृषि कार्यों के लिए मजदूरों की मजदूरी 150 रुपये प्रतिदिन तय की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित दरों से किसानों और मजदूरों के बीच अनावश्यक विवाद की स्थिति नहीं बनेगी।

बैठक में सामाजिक अनुशासन और ग्राम परंपराओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से तय किया कि बाजार से खरीदे गए बायलर मुर्गा, चेंडी मुर्गा और हाईब्रिड मुर्गा के सेवन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही यदि कोई व्यक्ति इस नियम का उल्लंघन करता है तो इसकी सूचना देने वाले व्यक्ति को 2 हजार रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार देने का भी निर्णय लिया गया।

ग्रामीणों के अनुसार यह फैसला गांव की पारंपरिक जीवनशैली, स्थानीय रीति-रिवाजों और सामुदायिक अनुशासन को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। उनका मानना है कि गांव के सभी लोग यदि सामूहिक रूप से तय नियमों का पालन करेंगे तो सामाजिक एकता और आपसी सहयोग की भावना मजबूत होगी।

बैठक में मौजूद किसानों ने कहा कि खेती-किसानी के मौसम में समय पर जुताई, रोपाई और अन्य कृषि कार्य पूरे होना आवश्यक है। इसके लिए मजदूरी और जुताई की दर पहले से तय होने से किसानों को सुविधा मिलेगी और कृषि कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होगी। साथ ही मजदूरों को भी निर्धारित पारिश्रमिक मिलने से कार्य प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गांव की परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समय-समय पर इस तरह की बैठकें आयोजित की जाती हैं। सामूहिक सहमति से लिए गए निर्णयों का पालन सभी ग्रामीणों की जिम्मेदारी होगी। उनका विश्वास है कि इन नियमों से खेती-किसानी बेहतर ढंग से संचालित होगी, सामाजिक अनुशासन मजबूत होगा और गांव में आपसी समन्वय तथा सहयोग की भावना और अधिक सुदृढ़ होगी।