शराब की ओवररेटिंग से 3870 करोड़ का घोटाला, भाजपा सरकार पर कांग्रेस का बड़ा आरोप
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर शराब की ओवररेटिंग के जरिए ढाई वर्षों में 3870 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने मामले की ईडी और सीबीआई से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश में शराब की ओवररेटिंग और अवैध कारोबार को संरक्षण मिल रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर शराब की ओवररेटिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से निर्धारित कीमत से अधिक दर पर शराब बेची जा रही है और पिछले ढाई वर्षों में इस कथित ओवररेटिंग से लगभग 3870 करोड़ रुपये की अवैध वसूली हुई है। पार्टी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि प्रदेशभर में शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये से लेकर 60 रुपये तक अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है। उनका कहना है कि यह कथित वसूली संगठित तरीके से हो रही है और इसे सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।
कांग्रेस ने दावा किया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 28 लाख 65 हजार बोतल शराब की बिक्री होती है। यदि प्रत्येक बोतल पर अतिरिक्त राशि वसूली जा रही है तो प्रतिदिन करोड़ों रुपये की अवैध कमाई हो रही है। पार्टी का आरोप है कि इसी आधार पर ढाई वर्षों में लगभग 3870 करोड़ रुपये की कथित ओवररेटिंग हुई है।
प्रेस विज्ञप्ति में कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया में मामला सामने आने और जनविरोध बढ़ने के बाद कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई नहीं पहुंची। पार्टी का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर कथित रूप से इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
कांग्रेस ने राज्य में नकली, मिलावटी और अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने रायगढ़, रायपुर, राजनांदगांव, बलरामपुर और जगदलपुर सहित विभिन्न स्थानों पर कथित रूप से सामने आए मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
पार्टी ने मांग की है कि कथित शराब ओवररेटिंग प्रकरण की ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है तो उसे स्वतंत्र जांच से परहेज नहीं होना चाहिए।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष में रहते हुए शराबबंदी और शराब नीति को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद शराब व्यवस्था में सुधार करने के बजाय कथित अनियमितताओं को रोकने में विफल रही है।