बच्चों में डायबिटीज की समय पर पहचान और उपचार पर रायगढ़ में कार्यशाला, 170 स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
रायगढ़ में बच्चों में बढ़ते मधुमेह (डायबिटीज) की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले के 170 स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने बाल मधुमेह की पहचान, प्रबंधन और जागरूकता संबंधी तकनीकी जानकारी प्रदान की।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़, 4 जून 2026। बच्चों में बढ़ते मधुमेह यानी डायबिटीज की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रायगढ़ में एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित कुल 170 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को बाल मधुमेह की समय पर पहचान, उपचार और प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि समुदाय स्तर पर बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
कार्यशाला में यूनिसेफ के विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों में डायबिटीज के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, जिसके कारण प्रारंभिक पहचान और सही उपचार बेहद आवश्यक हो गया है। स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित कर उन्हें ऐसे लक्षणों की पहचान करने और समय पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान डायबिटीज की पहचान, उपचार और दीर्घकालिक प्रबंधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही रोगियों की काउंसलिंग, रोगी सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियों तथा मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग के महत्व पर भी विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमेह केवल शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ सकता है। इसलिए परिवार और समाज का सहयोग रोगी के बेहतर उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों और अनुभव साझा करने के माध्यम से विषय की गहन समझ विकसित की। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ेगी और वे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने इस पहल को बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि समय पर पहचान और उपचार से मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने समुदाय में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रशिक्षण का संचालन यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह और मास्टर ट्रेनर अक्षय तिवारी के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में जिला नोडल अधिकारी एनसीडी डॉ. कैनन डेनियल, सहायक नोडल सलाहकार डॉ. सुमित मंडल, जिला नोडल सिकल सेल डॉ. जावेद, रंजना पैकरा तथा सीमा बरेठ का विशेष योगदान रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन कम होना, थकान, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना तथा व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से परहेज और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है।