मुनगा पौधारोपण से कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की पहल, घर-घर पहुंचेगा पोषण का संदेश

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेमेतरा जिले में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के तहत "मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान" शुरू किया है। अभियान के तहत गंभीर कुपोषित बच्चों, गर्भवती एवं एनीमिक महिलाओं के घरों में मुनगा के पौधे लगाए गए। इसका उद्देश्य कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जनभागीदारी के माध्यम से पोषण जागरूकता बढ़ाना है।

Jul 8, 2026 - 15:14
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मुनगा पौधारोपण से कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की पहल, घर-घर पहुंचेगा पोषण का संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के स्वस्थ और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग लगातार नवाचार कर रहा है। इसी कड़ी में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के आह्वान पर प्रदेशभर में कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत बेमेतरा जिले में बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत "मुनगा पौधारोपण विथ सेल्फी अभियान" की शुरुआत की गई।

बेमेतरा जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), सेक्टर दाढ़ी-2 और सेक्टर कन्हेरा में विशेष अभियान आयोजित किया गया। अभियान के दौरान गंभीर कुपोषित बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा एनीमिया से प्रभावित महिलाओं के 18 घरों में मुनगा (सहजन) के पौधे लगाए गए। साथ ही परिवारों को पौधों की देखभाल, संरक्षण और नियमित उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

मुनगा को पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पौधा माना जाता है। इसकी पत्तियों, फलियों और फूलों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए, विटामिन-सी सहित कई आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मुनगा का नियमित सेवन गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार, एनीमिया की रोकथाम तथा बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान लाभार्थियों को मुनगा के पोषण एवं औषधीय गुणों की विस्तृत जानकारी भी दी गई।

इस अभियान की विशेषता यह रही कि इसे केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा गया। "विथ सेल्फी अभियान" के माध्यम से लोगों को पौधारोपण के साथ उसकी तस्वीर साझा करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस जनअभियान से जुड़ें और पौधों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित हो। विभाग का मानना है कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर में पोषण देने वाले पौधे लगाए और उनका नियमित उपयोग करे तो कुपोषण एवं एनीमिया जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनसहभागिता और जागरूकता से जीती जा सकती है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर बच्चों, किशोरियों और माताओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है। इसी सोच के साथ प्रदेश में ऐसे नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अभियान में सेक्टर सुपरवाइजर, मिशन शक्ति की जेंडर विशेषज्ञ, सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल हुए। विभाग को उम्मीद है कि यह पहल कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।