छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ में विवाद गहराया, शशांक दुबे ने असंवैधानिक गतिविधियों पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ की नई कार्यकारिणी के गठन के बाद संगठन में विवाद सामने आया है। महासचिव शशांक दुबे ने कुछ लोगों पर असंवैधानिक गतिविधियों और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, सूरजपुर। छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ में नई कार्यकारिणी के गठन के बाद अब संगठन के भीतर विवाद गहराता नजर आ रहा है। संघ के प्रदेश महासचिव शशांक दुबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कुछ व्यक्तियों पर असंवैधानिक गतिविधियों और संगठन को कमजोर करने के प्रयासों का आरोप लगाया है। उन्होंने पत्रकार साथियों से अपील की है कि वे किसी भी बैठक या निर्णय में शामिल होने से पहले संघ के बायलाज का अध्ययन अवश्य करें।
शशांक दुबे ने बताया कि संघ का पंजीयन क्रमांक 411 है और हाल ही में बिलासपुर में सैकड़ों पत्रकारों की उपस्थिति में लोकतांत्रिक तरीके से नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इस चुनाव प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और अनुशासन के साथ संपन्न कराया गया। चुनाव अधिकारी विनोद सिंह ठाकुर की निगरानी में 22 फरवरी 2026 को यह प्रक्रिया पूरी हुई।
नई कार्यकारिणी में दुर्ग जिले से लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे सुबोध तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। इसके अलावा कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में महेश तिवारी और कृष्णा सिंह बाबा, उपाध्यक्ष के रूप में राजेश मोदी और अभिषेक शर्मा, कोषाध्यक्ष के रूप में राधेश्याम कोरी, संगठन सचिव के रूप में डॉ. अजय चक्रधारी, सचिव अनिल आहूजा तथा संयुक्त सचिव के रूप में प्रीति सरू का चयन किया गया। इसके साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी में 27 सदस्यों की टीम भी गठित की गई है।
दुबे ने बताया कि इस नई कार्यकारिणी की सूची श्रम आयुक्त कार्यालय रायपुर में विधिवत जमा कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ “विघ्न संतोषी तत्व” नई कार्यकारिणी के गठन के बाद असंवैधानिक तरीके से संगठन में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, कुछ लोग बिना किसी वैधानिक आधार के बैठक आयोजित कर प्रदेश कार्यसमिति को भंग करने और तदर्थ समिति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि संघ के बायलाज में ऐसी किसी प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से बीडी निजामी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी स्वार्थ के चलते पत्रकारों को गुमराह कर रहे हैं और असंवैधानिक तरीके से नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। दुबे ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह अवैध है और इसकी जानकारी श्रम आयुक्त कार्यालय को दे दी गई है।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया कि बीडी निजामी ने वर्ष 2012 से 2025 तक विभिन्न पदों पर रहते हुए लंबे समय तक संगठन का नेतृत्व किया, लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान कई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि 2015 के बाद से 2025 तक उन्होंने श्रम आयुक्त कार्यालय को आवश्यक दस्तावेज, आय-व्यय का विवरण और ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की।
दुबे के अनुसार, जब उनसे संगठन के दस्तावेज, बैंक पासबुक और अन्य आवश्यक जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने उपलब्ध नहीं कराई। साथ ही, उन पर संगठन के नियमों के विरुद्ध जाकर एकतरफा निर्णय लेने, पदाधिकारियों की नियुक्ति और निष्कासन करने तथा आर्थिक अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
इन सभी आरोपों की पुष्टि के बाद 11 जनवरी 2026 को बिलासपुर के रतनपुर में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में उपस्थित पत्रकारों ने सर्वसम्मति से बीडी निजामी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने और उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया। इसकी सूचना भी श्रम आयुक्त कार्यालय को भेजी गई।
दुबे ने कहा कि बीडी निजामी द्वारा व्यावसायिक संघ अधिनियम 1926 और छत्तीसगढ़ व्यवसायिक संघ नियम 1961 के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया, जिससे संगठन के अस्तित्व पर भी संकट उत्पन्न हो गया था। उन्होंने यह भी बताया कि श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी नोटिसों का भी जवाब नहीं दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि निष्कासन के बाद अब कुछ लोगों को साथ लेकर असंवैधानिक तरीके से कवर्धा में नए अध्यक्ष के चुनाव की साजिश रची जा रही है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे ऐसे किसी भी प्रयास से सतर्क रहें और संगठन की वैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करें।
अंत में शशांक दुबे ने कहा कि पूरे मामले से राज्य शासन को भी अवगत कराया जा रहा है और पत्रकारों को फर्जी संगठनों से सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने दोहराया कि संघ पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी असंवैधानिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।