कांग्रेस का धरना किसानों के नाम पर राजनीतिक नौटंकी : रामचरित द्विवेदी
मनेन्द्रगढ़ में कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रामचरित द्विवेदी ने इसे किसानों के नाम पर की जा रही राजनीतिक नौटंकी बताते हुए कहा कि साय सरकार के कार्यकाल में धान खरीदी ने सभी रिकॉर्ड तोड़े हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, मनेन्द्रगढ़। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर किए गए धरना-प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रामचरित द्विवेदी ने कांग्रेस के आंदोलन को किसानों के नाम पर की जा रही राजनीतिक नौटंकी करार दिया है।
मीडिया प्रभारी रामचरित द्विवेदी ने कहा कि साय सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में धान खरीदी ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस द्वारा धरना-प्रदर्शन का आह्वान यह साबित करता है कि पार्टी के पास न तो कोई ठोस मुद्दा है और न ही कोई स्पष्ट नीति। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है।
द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश में अब तक हजारों मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। लाखों किसान समर्थन मूल्य पर अपना धान बेच चुके हैं। उन्होंने कहा कि एमसीबी जिले में भी सरकार द्वारा एक-एक दाना धान की खरीदी की जा रही है और किसानों को भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सीधे उनके खातों में किया जा रहा है।
भाजपा मीडिया प्रभारी ने कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि जब न तो भुगतान में देरी है, न तौल में परेशानी और न ही बारदाने की कोई कमी है, तो फिर धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम आखिर किस मुद्दे पर किया जा रहा है?
उन्होंने कांग्रेस के पूर्व शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किसानों को भुगतान के लिए महीनों तक भटकना पड़ता था और राशि चार किस्तों में मिलती थी। आज वही कांग्रेस किसानों के नाम पर राजनीति चमकाने सड़कों पर उतर रही है।
रामचरित द्विवेदी ने कहा कि यदि धान खरीदी केंद्रों पर कहीं भी कोई समस्या उत्पन्न होती है तो सरकार तत्काल उसका समाधान कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस का यह चक्काजाम न तो किसान हित में है और न ही प्रदेश हित में। यह आने वाले चुनावों को देखते हुए हताश कांग्रेस की सस्ती राजनीति का हिस्सा है।
अंत में उन्होंने जनता से अपील की कि कांग्रेस के भ्रमजाल में न आएं और साय सरकार की किसान-हितैषी नीतियों पर विश्वास बनाए रखें।