केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी, रेलवे नेटवर्क में 224 किमी का विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र और गुजरात के 4 जिलों में दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत 2,781 करोड़ रुपये है। इससे भारतीय रेलवे नेटवर्क में 224 किमी का विस्तार होगा और क्षमता व कनेक्टिविटी में प्रमुख सुधार होगा।

Nov 27, 2025 - 11:44
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी, रेलवे नेटवर्क में 224 किमी का विस्तार

 UNITED  NEWS OF ASIA.  हसिब अख्तर, रायपुर | प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लगभग 2,781 करोड़ रुपये की दो प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है, जो भारतीय रेलवे के नेटवर्क विस्तार और क्षमता वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं में देवभूमि द्वारका (ओखा)–कानालूस खंड का 141 किलोमीटर लंबा दोहरीकरण तथा बदलापुर–कर्जत खंड की 32 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण शामिल है। दोनों परियोजनाएँ महाराष्ट्र और गुजरात के चार जिलों को कवर करेंगी तथा रेलवे नेटवर्क में कुल 224 किलोमीटर का विस्तार करेंगी।

इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लाइन क्षमता बढ़ेगी, जिससे रेलवे की मोबिलिटी, परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में बड़ा सुधार होगा। यह परियोजनाएँ प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के “नए भारत” के विजन के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड प्लानिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन परियोजनाओं से लगभग 585 गाँवों में रहने वाले 32 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।

ओखा–कानालूस दोहरीकरण परियोजना से प्रसिद्ध धार्मिक स्थल द्वारकाधीश मंदिर सहित पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुगम होगी। वहीं बदलापुर–कर्जत परियोजना मुंबई उपनगरीय गलियारे की मांगों को पूरा करेगी और दक्षिण भारत के लिए कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगी।

इन मार्गों से कोयला, नमक, कंटेनर, सीमेंट और पीओएल जैसी आवश्यक वस्तुओं का परिवहन होता है। नई क्षमता से रेलवे पर 18 एमटीपीए तक अतिरिक्त माल ढुलाई संभालना संभव होगा। रेलवे के पर्यावरण-अनुकूल परिवहन माध्यम होने के कारण तेल आयात में प्रति वर्ष लगभग 3 करोड़ लीटर की कमी आएगी और 16 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होगा, जो लगभग 64 लाख पेड़ लगाने के बराबर है।

ये परियोजनाएँ न केवल रेलवे नेटवर्क को मज़बूती प्रदान करेंगी बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगी।