कार्यक्रम का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. तुरे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि बोड़ला क्षेत्र के लिए यह विजन सेंटर एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित यह केंद्र अब स्थानीय स्तर पर बेहतर नेत्र जांच और उपचार सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
डॉ. तुरे ने विशेष रूप से बताया कि इस केंद्र के माध्यम से मोतियाबिंद जैसे नेत्र रोगों की समय पर पहचान और उपचार संभव हो सकेगा। इससे दूरस्थ ग्रामीण और बैगा आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को काफी राहत मिलेगी, जिन्हें पहले इलाज के लिए दूर शहरों तक जाना पड़ता था।
कार्यक्रम में चोलामंडलम संस्था के प्रतिनिधि लतीफ (ब्रांच मैनेजर), जायसवाल और सिन्हा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक अनुपमा तिवारी, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम सिंह राजपूत, बीपीएम रूपेश साहू, नेत्र सहायक भीषम कोसले, जन कल्याण सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष योगेंद्र प्रताप सिंह तथा उदयाचल सामाजिक संस्था के हेमंत तिवारी, पवन लोहिया और विजय हरिहरनो सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर साइटसेवर्स इंडिया रायपुर की प्रोग्राम ऑफिसर पूजा सोनी ने बताया कि “नेत्र वसंत रूरल आई हेल्थ प्रोग्राम” के अंतर्गत बैगा बाहुल्य क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए बोड़ला और पंडरिया ब्लॉक का चयन किया गया है। इस अभियान के तहत व्यापक सर्वेक्षण और नेत्र जांच शिविरों के माध्यम से 3 हजार से अधिक मोतियाबिंद मरीजों की पहचान की जा चुकी है।
इन मरीजों को उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों जैसे उदयाचल सामाजिक संस्था (राजनांदगांव), सूर्य नेत्रालय कबीरधाम और जिला चिकित्सालय कबीरधाम में भेजा गया, जहां सफल सर्जरी के माध्यम से उन्हें दृष्टि लाभ प्रदान किया जा रहा है।
इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग, जन कल्याण सामाजिक संस्थान, उदयाचल सामाजिक संस्था और चोलामंडलम संस्था का उल्लेखनीय योगदान रहा है। सभी के सामूहिक प्रयास से बैगा अंचलों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिल रही है।
नव स्थापित विजन सेंटर के माध्यम से अब क्षेत्र के लोगों को नियमित नेत्र जांच, दृष्टि परीक्षण, मोतियाबिंद की पहचान और आवश्यक परामर्श की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होगी। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा और अनावश्यक रूप से दूर शहरों की यात्रा करने की आवश्यकता भी कम होगी।
यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।