विश्वविद्यालय की मनमानी पर छात्रों का आक्रोश: परीक्षा से डेढ़ महीने पहले 500 रुपये विलंब शुल्क पर भड़के छात्र, रचित मिश्रा ने जताई कड़ी आपत्ति

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय द्वारा मुख्य परीक्षा 2025-26 के लिए विलंब शुल्क 100 से बढ़ाकर 500 रुपये किए जाने पर छात्र संगठनों में रोष है। आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा ने इसे छात्र विरोधी बताते हुए कुलपति को ज्ञापन सौंपा और निर्णय वापस लेने की मांग की है।

Jan 9, 2026 - 16:27
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विश्वविद्यालय की मनमानी पर छात्रों का आक्रोश: परीक्षा से डेढ़ महीने पहले 500 रुपये विलंब शुल्क पर भड़के छात्र, रचित मिश्रा ने जताई कड़ी आपत्ति

UNITED NEWS OF ASIA. आकाश सोनकर, सरगुजा | संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मुख्य परीक्षा सत्र 2025-26 के लिए जारी की गई नई अधिसूचना ने छात्र जगत में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। विश्वविद्यालय ने 8 जनवरी 2026 को जारी आदेश में परीक्षा आवेदन पत्र के लिए विलंब शुल्क को अचानक ₹100 से बढ़ाकर ₹500 कर दिया है। इस निर्णय को छात्र विरोधी बताते हुए आजाद सेवा संघ के प्रदेश सचिव रचित मिश्रा ने विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

रचित मिश्रा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन बिना किसी ठोस कारण के गरीब, ग्रामीण और आदिवासी अंचल से आने वाले विद्यार्थियों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर देना होता है, न कि उनसे जबरन भारी शुल्क वसूलना। विश्वविद्यालय का यह फैसला शिक्षा के मूल उद्देश्य के विपरीत है।

छात्र नेता ने बताया कि अब तक विश्वविद्यालय में विलंब शुल्क की राशि ₹100 निर्धारित थी, जिसे अचानक पांच गुना बढ़ा देना पूरी तरह से अनुचित और तर्कहीन है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्य परीक्षाओं के आयोजन में अभी भी लगभग डेढ़ महीने का समय शेष है, तो इतनी अधिक विलंब शुल्क लगाने की क्या आवश्यकता है। सामान्यतः यह शुल्क तब लगाया जाता है जब परीक्षा तिथि नजदीक हो और प्रशासनिक कार्यों में कठिनाई आती हो, लेकिन वर्तमान परिस्थिति इससे बिल्कुल अलग है।

रचित मिश्रा ने सरगुजा संभाग की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि यहां का अधिकांश छात्र वर्ग ग्रामीण पृष्ठभूमि से आता है, जिनके लिए सामान्य परीक्षा शुल्क जुटाना भी कठिन होता है। ऐसे में ₹500 का विलंब शुल्क कई मेधावी छात्रों को परीक्षा से वंचित कर सकता है, जो भविष्य के साथ अन्याय होगा।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि 15 जनवरी 2026 तक भरे जाने वाले परीक्षा फॉर्म पर विलंब शुल्क को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। साथ ही विश्वविद्यालय से छात्र हित में संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की गई है।

रचित मिश्रा ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते इस आदेश को वापस नहीं लिया, तो आजाद सेवा संघ छात्र हितों की रक्षा के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा। यह आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।