बिलासपुर प्लेस ऑफ सेफ्टी घटना पर बाल अधिकार आयोग सख्त, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश

बिलासपुर प्लेस ऑफ सेफ्टी से चार विधि-विरुद्ध बालकों के फरार होने और सुरक्षा कर्मी की हत्या की घटना पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा, फरार बालकों की शीघ्र तलाश और संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

Jul 14, 2026 - 10:55
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बिलासपुर प्लेस ऑफ सेफ्टी घटना पर बाल अधिकार आयोग सख्त, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. बिलासपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (विशेष गृह) में सुरक्षा कर्मी की हत्या और चार विधि-विरुद्ध बालकों के फरार होने की गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने घटना को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था और पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की

आयोग के अनुसार डॉ. वर्णिका शर्मा ने छह दिसंबर 2025 को बिलासपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बच्चों के आवास, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य, सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की उपलब्धता, न्यायिक प्रकरण, काउंसलिंग और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया गया था। उस समय पेयजल, भोजन, सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ की कमी और संस्थागत प्रबंधन से जुड़ी कई कमियां सामने आई थीं, जिनके सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे।

13 जुलाई 2026 को सामने आई घटना के बाद आयोग ने तत्काल ऑनलाइन समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई, प्लेस ऑफ सेफ्टी के अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हुए। बैठक में पूर्व निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा की गई और सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

आयोग की अध्यक्ष ने विशेष किशोर पुलिस इकाई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि फरार हुए चारों बालकों से संबंधित उपलब्ध सभी जानकारियां एकत्रित कर विशेष टीम गठित की जाए। संभावित ठिकानों, संपर्क सूत्रों और अन्य आवश्यक सूचनाओं के आधार पर समन्वित खोज अभियान चलाकर बालकों का जल्द पता लगाने के प्रयास तेज किए जाएं।

समीक्षा बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि इस प्रकार के गंभीर मामलों में शासन को प्रत्येक कार्रवाई की जानकारी केवल मौखिक रूप से नहीं, बल्कि विधिवत लिखित प्रतिवेदन के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जाए। आयोग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी महत्वपूर्ण घटनाओं की विस्तृत रिपोर्ट समयबद्ध रूप से प्रस्तुत की जानी चाहिए।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों से संस्था की स्वीकृत क्षमता, वर्तमान में रह रहे बच्चों की संख्या, उपलब्ध काउंसलरों की संख्या, उनकी कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था में किए गए सुधार, घटना के संबंध में की गई कार्रवाई तथा भविष्य की कार्ययोजना का विस्तृत प्रतिवेदन भी मांगा है।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देश दिया कि प्रत्येक बालक की मानसिक स्थिति और मनोसामाजिक आवश्यकताओं का नियमित आकलन किया जाए तथा आवश्यकता के अनुरूप काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि बाल देखरेख संस्थानों में सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशील कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की नियमित निगरानी की जाएगी और आवश्यकता अनुसार आगे भी नियमानुसार कार्रवाई एवं अनुशंसाएं जारी की जाएंगी।