बिहान से बदली तक़दीर: मछली पालन से आत्मनिर्भर बनीं फुलबती मरकाम, गांव से सरपंच तक का प्रेरक सफर
कोंडागांव जिले की फुलबती मरकाम ने बिहान स्व-सहायता समूह से जुड़कर मछली पालन और मुर्गी पालन के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी पेश की। आज वे सरपंच हैं और सालाना डेढ़ लाख से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुरेगांव की सरपंच एवं बिहान स्व-सहायता समूह की सचिव श्रीमती फुलबती मरकाम आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला उनका परिवार आज समृद्धि की राह पर है, जिसकी बुनियाद बनी—बिहान योजना और उनका अटूट आत्मविश्वास।
स्वयं सहायता समूह से शुरू हुआ बदलाव
फुलबती मरकाम वर्ष 2011 में स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। उस समय उनका जीवन बेहद साधारण था और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बच्चों की पढ़ाई कराना भी चुनौती बन गया था। वर्ष 2018 में जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ीं, तब उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई।
बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका के नए अवसरों की जानकारी मिली। फुलबती बताती हैं कि इससे पहले व्यवसाय और स्वरोजगार उनके लिए केवल सुनी-सुनाई बातें थीं।
छोटे निवेश से बड़ी सफलता
बिहान समूह से जुड़कर फुलबती ने सबसे पहले 5 हजार रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया। इसमें से 2 हजार रुपये मछली बीज खरीदने में और शेष 3 हजार रुपये घरेलू जरूरतों में लगाए। यह छोटा निवेश उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया।
मछली पालन से उन्हें लगभग 20 हजार रुपये की आय हुई, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ा।
इसके बाद उन्होंने 10 हजार रुपये और फिर धीरे-धीरे 1 लाख रुपये तक का ऋण लेकर अपने व्यवसाय का विस्तार किया। निरंतर मेहनत और सही मार्गदर्शन के चलते उनकी आमदनी बढ़ती चली गई। आज वे मछली पालन से सालाना 1 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं।
प्रशिक्षण ने दी नई दिशा
बिहान के अधिकारियों ने उनके घर में पहले से मौजूद तालाब को देखकर मछली पालन का सुझाव दिया। फुलबती ने नारायणपुर जाकर 10 दिनों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया, जहां उन्हें मछली पालन की आधुनिक तकनीक, तालाब प्रबंधन, प्रजातियों का चयन और बाजार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। यह प्रशिक्षण उनके लिए निर्णायक साबित हुआ।
बच्चों की शिक्षा और बेहतर जीवन
फुलबती बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब वे आर्थिक मजबूरी के कारण अपने बड़े बेटे की पढ़ाई रोकने का विचार कर रही थीं। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
उनका बड़ा बेटा रायपुर में बी.एड. की पढ़ाई कर रहा है और कोचिंग भी ले रहा है। वे गर्व से कहती हैं कि अब वे अपने बच्चों को उनकी पसंद के अनुसार शिक्षा दिला पा रही हैं।
मछली पालन के साथ मुर्गी पालन भी
मछली पालन के अलावा फुलबती मरकाम मुर्गी पालन का कार्य भी कर रही हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं। विविध आजीविका गतिविधियों ने उनके परिवार को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना दिया है और उनका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।
महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा
फुलबती का मानना है कि पहले गांवों में महिलाओं के पास अपनी आय नहीं होती थी, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।
“आज महिलाएं खुद कमाना सीख रही हैं, आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार के फैसलों में बराबरी की भूमिका निभा रही हैं,” वे कहती हैं।
आज फुलबती मरकाम न केवल बिहान समूह की सचिव हैं, बल्कि ग्राम पंचायत चुरेगांव की निर्वाचित सरपंच भी हैं। एक साधारण ग्रामीण महिला से सरपंच बनने तक का उनका सफर सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
वे गांव की अन्य महिलाओं से अपील करती हैं कि वे कभी हिम्मत न हारें। छोटे-छोटे व्यवसाय घर से ही शुरू किए जा सकते हैं। सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से हर महिला अपनी तक़दीर बदल सकती है। उनकी यह सफलता शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल है।