क्या थानेदार ही टायर चोर है? थाने से टायर चोरी का खुलासा नहीं, उल्टा पत्रकार को किया गिरफ्तार!
बसंतपुर थाना परिसर से टायर और धान गायब होने के मामले में जांच पूरी नहीं होने के बावजूद एक पत्रकार की गिरफ्तारी से विवाद गहरा गया है। पत्रकार संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
- क्या पत्रकार को जेल भेजने के बाद टायर चोर खुद थाने आकर सरेंडर करेगा?
- क्या पुलिस अधीक्षक को मामले की जानकारी नहीं है?
- आखिर टायर मिलने के बाद पुलिस ने टायर जप्त किया?
- क्या पुलिस को बचाने की कोशिश की जा रही है?
- क्या थानेदार ही टायर चोर है?
- क्या इसी बौखलाहट में पत्रकार को जेल भेजने का षड्यंत्र किया जा रहा है?
- बसंतपुर थाना पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल!
UNITED NEWS OF ASIA. हेमंत कुमार, रायपुर/बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र से एक बार फिर पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। थाना परिसर से कथित रूप से टायर और धान गायब होने के मामले की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है, लेकिन इस पूरे मामले को उजागर करने वाले पत्रकार पर ही कार्रवाई कर गिरफ्तारी किए जाने से क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, बसंतपुर थाना में पहले से जब्त वाहन से टायर गायब होने और पुलिस कस्टडी से धान कम होने का मामला सामने आया था। इस खबर को स्थानीय पत्रकार द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिसके बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई थी। समाचार प्रकाशित होने के बाद लोगों ने थाना सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर कई सवाल उठाए थे।
इसी बीच थाना बसंतपुर द्वारा पत्रकार रामहरी गुप्ता के खिलाफ धारा 308 (2)(6) धाराओं में मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की सूचना जारी कर दी गई। गिरफ्तारी सूचना पत्र में आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने का उल्लेख किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद पत्रकार संगठनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि थाना परिसर से चोरी या सामान गायब होने जैसे गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार पर कार्रवाई करना कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि थाना परिसर ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा व्यवस्था पर कैसे भरोसा किया जाए। वहीं पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका सच सामने लाने की होती है और यदि खबर प्रकाशित करने पर ही कार्रवाई होने लगे तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार माना जाएगा।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। लोग मांग कर रहे हैं कि थाना से गायब हुए सामान की निष्पक्ष जांच हो और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।