बालोद में दहेज प्रताड़ना केस: पति समेत 4 गिरफ्तार, आत्महत्या मामले में 4 माह बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

बालोद जिले के गुरूर थाना क्षेत्र में नवविवाहिता की आत्महत्या मामले में पुलिस ने चार माह की जांच के बाद पति, सास, ससुर और ननद को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। जांच में दहेज की मांग, रंग-रूप को लेकर ताने और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

Jul 8, 2026 - 10:45
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बालोद में दहेज प्रताड़ना केस: पति समेत 4 गिरफ्तार, आत्महत्या मामले में 4 माह बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l बालोद जिले के गुरूर थाना क्षेत्र में नवविवाहिता की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने चार माह की विस्तृत जांच के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए पति समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई को जिले में दहेज प्रताड़ना से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, 24 फरवरी 2026 को गुरूर स्थित गुलमोहर कॉलोनी के एक किराए के मकान में रहने वाली 28 वर्षीय मीनाक्षी भतरिया ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना की सूचना मिलने के बाद गुरूर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। शुरुआती जांच के साथ ही पुलिस ने मृतका के परिजनों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए तथा घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की।

पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के मार्गदर्शन और एसडीओपी माया शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने मामले की गहन जांच की। जांच के दौरान कॉल डिटेल, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि विवाह के बाद से मीनाक्षी को लगातार दहेज कम लाने के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। इसके अलावा उसके रंग-रूप को लेकर ताने दिए जाते थे और उसे मानसिक रूप से परेशान किया जाता था।

पुलिस जांच में पति प्रवीण भतरिया, ससुर पग्गू लाल भतरिया, सास गीता भतरिया और ननद करूणा चतुर्वेदानी की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर गुरूर थाना पुलिस ने दुर्ग जिले के पथर्रा गांव में दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश पर चारों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर की गई है। विवेचना के दौरान प्राप्त सभी तथ्यों और दस्तावेजी प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद ही आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में आगे की विवेचना नियमानुसार जारी रहेगी और यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला दहेज प्रताड़ना और घरेलू उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता और साक्ष्य आधारित कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।