आंजनेय विश्वविद्यालय में ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का शुभारंभ, बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स
रायपुर के आंजनेय विश्वविद्यालय में बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (PGDPCR) के नए बैच ‘रक्षक’ का शुभारंभ किया गया। यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम में बाल संरक्षण के लिए कानून की जानकारी के साथ व्यावहारिक समझ, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित करने पर जोर दिया गया। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थियों के लिए बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थानों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित एवं संवेदनशील मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर ने महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (PGDPCR) के नए बैच ‘रक्षक’ का शुभारंभ किया गया। यह पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CGSCPCR) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
‘रक्षक’ पाठ्यक्रम को राज्य में बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में एक साझा शैक्षणिक पहल के रूप में शुरू किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य के विश्वविद्यालयों के साथ समझौते के माध्यम से इस पहल को आगे बढ़ाया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और संरक्षण से जुड़े कानूनों की जानकारी देने के साथ उन्हें जमीनी स्तर पर बाल संरक्षण व्यवस्था को समझने के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा कि ‘रक्षक’ केवल एक पाठ्यक्रम का नाम नहीं है, बल्कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी है। उन्होंने कहा कि आज बच्चों को हिंसा, शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, साइबर जोखिम और अन्य चुनौतियों से बचाने के लिए प्रशिक्षित एवं संवेदनशील मानव संसाधन की आवश्यकता है। ऐसे में यह पाठ्यक्रम युवाओं को ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास है।
आंजनेय विश्वविद्यालय के चांसलर अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों का सैद्धांतिक अध्ययन कराना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को बाल संरक्षण व्यवस्था की व्यावहारिक समझ प्रदान करना भी है। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में बाल अधिकारों से जुड़े कानूनों, सरकारी योजनाओं, संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली, विभागीय प्रक्रियाओं और बाल संरक्षण इकाइयों के कार्यों की जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में कुलपति डॉ टी रामाराव ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल कानून और संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम युवाओं को इस सामाजिक जिम्मेदारी के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए संवेदनशीलता, कानून की समझ और व्यावहारिक दृष्टिकोण आवश्यक है।
लॉ संकाय के डीन एवं पाठ्यक्रम के संचालन के अध्यक्ष डॉ के.सी. दलाई ने पाठ्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक न्याय, मौलिक अधिकार और मानवाधिकारों के अंतर्गत बच्चों के हितों की रक्षा के लिए अनेक संवैधानिक प्रावधान और कानून मौजूद हैं। हालांकि बाल अधिकार संरक्षण ऐसा क्षेत्र है, जिसमें केवल कानूनी जानकारी पर्याप्त नहीं है। बच्चों की परिस्थितियों, उनकी आवश्यकताओं, संरक्षण तंत्र और जमीनी स्तर पर होने वाली कार्यवाही की समझ भी आवश्यक है। ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा। सरकारी विभागों, बाल संरक्षण इकाइयों और संबंधित संस्थाओं की कार्यप्रणाली से परिचित होने के साथ विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में बाल संरक्षण व्यवस्था की भूमिका को समझने का अवसर मिलेगा। इससे युवाओं में बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी।
पाठ्यक्रम पूरा करने पर रोजगार के अवसर
‘रक्षक’ पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को बाल अधिकारों की समझ के साथ रोजगार के नए अवसरों से भी जोड़ने का प्रयास करेगा। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थी बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय से जुड़े संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, बाल देखभाल संस्थानों और सामाजिक विकास परियोजनाओं में कार्य के अवसर तलाश सकेंगे। इसके अलावा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों में भी बाल संरक्षण से संबंधित भूमिकाओं के लिए उनकी विशेषज्ञता उपयोगी हो सकती है।
कार्यक्रम का संचालन लॉ विभाग की सहायक प्राध्यापक पलक ओटवानी ने किया। आभार प्रदर्शन एजुकेशन विभाग की सहायक प्राध्यापक कुमारी विद्याभूषण ने किया। उद्घाटन अवसर पर महानिदेशक डॉ बीसी जैन, डायरेक्टर डॉ जयेंद्र नारंग, कुलसचिव डॉ रुपाली चौधरी, डायरेक्टर एकेडमिक डॉ संध्या वर्मा सहित विभिन्न संकायों के डीन, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
आंजनेय विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की यह पहल बाल अधिकारों के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने के साथ समाज में बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘रक्षक’ के माध्यम से विद्यार्थियों को कानून, संस्थागत व्यवस्था और व्यावहारिक अनुभव से जोड़कर ऐसे प्रोफेशनल्स तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जो बच्चों के अधिकारों और संरक्षण से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी के साथ कार्य कर सकें।