कृषि विद्यार्थियों ने बानगर में अजोला, गेंदा पिंचिंग और मोरिंगा मूल्य–वर्धन प्रशिक्षण दिया

कृषि महाविद्यालय कुरूद के चौथे वर्ष के विद्यार्थियों ने ग्राम बानगर में ग्रामीण किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों को अजोला बेड निर्माण, गेंदा फसल में पिंचिंग तकनीक और मोरिंगा पत्तियों के मूल्य–वर्धन उत्पाद निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

Nov 26, 2025 - 18:47
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कृषि विद्यार्थियों ने बानगर में अजोला, गेंदा पिंचिंग और मोरिंगा मूल्य–वर्धन प्रशिक्षण दिया

 UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन,  धमतरी। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर) के चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों ने "ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव" (RAWE) कार्यक्रम के तहत ग्राम बानगर में किसानों और महिला स्व–सहायता समूहों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने अजोला बेड निर्माण की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया और बताया कि अजोला उच्च प्रोटीन युक्त पशुचारा, मछली पालन के लिए पोषक तत्व और जैव–उर्वरक के रूप में उपयोगी है। इसके बाद गेंदा फसल में पिंचिंग तकनीक का प्रत्यक्ष प्रदर्शन करते हुए किसानों को समझाया गया कि 25–30 दिन की अवस्था में शीर्ष कलिका को हटाने से शाखाओं की संख्या बढ़ती है, पौधे संतुलित रहते हैं और फूल अधिक व समान रूप से लगते हैं, जिससे उत्पादन में 20–25 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है।

महिला स्व-सहायता समूहों को मोरिंगा पत्तियों की वैज्ञानिक तुड़ाई, छाया में सुखाने, भंडारण और पैकिंग विधियाँ सिखाई गईं, ताकि वे पत्तियों से पाउडर, ग्रीन टी, कैप्सूल और मिश्रित दलिया/सेवई जैसे मूल्य–वर्धित उत्पाद तैयार कर घरेलू आय बढ़ा सकें।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. नवनीत राणा (डीन) के दिशानिर्देशन, डॉ. भूमिका हत्गिया (RAWE समन्वयक) के मार्गदर्शन तथा डॉ. गुलाब बर्मन और  सोनू दिवाकर (विषय विशेषज्ञ) के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।