बिजली दरों में बढ़ोतरी के विरोध में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
आम आदमी पार्टी ने 1 जुलाई से प्रस्तावित बिजली दरों में वृद्धि का विरोध करते हुए रायपुर में विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने बिजली दरों में बढ़ोतरी को आम उपभोक्ताओं और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए निर्णय वापस लेने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई 2026 से प्रस्तावित बिजली दरों में वृद्धि के विरोध में आम आदमी पार्टी ने शुक्रवार को रायपुर में विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपकर सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि बिजली दरों में बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं, किसानों और छोटे व्यवसायियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक बिजली उत्पादन अधिशेष (सरप्लस) राज्य है, इसके बावजूद घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में वृद्धि किया जाना जनहित के विपरीत है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता की घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
पार्टी नेताओं के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा 1 जुलाई 2026 से घरेलू बिजली दरों में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि का निर्णय लिया गया है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी हो सकती है। वहीं गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि का प्रावधान किया गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कृषि पंपों के लिए उपयोग होने वाली बिजली पर भी 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक अतिरिक्त भार किसानों को वहन करना पड़ सकता है। पार्टी का कहना है कि इससे खेती की लागत बढ़ेगी और किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े बकायादारों से करोड़ों रुपये की बकाया राशि वसूलने में सफल नहीं हो पा रही है, जबकि आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों में वृद्धि कर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले बकाया राशि की वसूली पर ध्यान देना चाहिए, न कि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहिए।
पार्टी ने राज्य सरकार से बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि पर पुनर्विचार करने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो पार्टी भविष्य में व्यापक जनआंदोलन भी कर सकती है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सूरज उपाध्याय, विजय झा, अनुषा जोसेफ, मिहिर कुर्मी, नंदन सिंह, रिजवान शरीफ, स्वाति तिवारी, इमरान खान, शिव शर्मा, सागर क्षीरसागर, वीरेंद्र पवार, बलवंत सिंह, विकास दास मानिकपुरी और प्रकाश चक्रधारी राजा सहित पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।