गरियाबंद में फिर हाथियों का आतंक, कमार परिवार का घर तोड़ा, चार दिन बाद भी नहीं पहुंचा वन विभाग
गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के सिहार गांव में जंगली हाथियों ने विशेष पिछड़ी जनजाति कमार परिवार के मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के चार दिन बाद भी वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है। प्रभावित परिवार ने मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जिड़ार के आश्रित ग्राम सिहार में एक बार फिर जंगली हाथियों की दहशत देखने को मिली। हाथियों के दल ने गांव में घुसकर विशेष पिछड़ी जनजाति कमार परिवार के एक मकान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान घर में रखी खाद्यान्न सामग्री, दैनिक उपयोग का सामान और अन्य घरेलू वस्तुओं को भी नुकसान पहुंचा। घटना के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है, जबकि ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का दल देर रात गांव में पहुंचा और कमार परिवार के घर को निशाना बनाया। हाथियों ने मकान की दीवारों और छप्पर को तोड़ दिया, जिससे घर में रखा सामान भी नष्ट हो गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनके सामने अब रहने और खाने-पीने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। घटना के बाद गांव के लोग पूरी रात भय के साये में रहे।
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक वन विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचा है। न तो नुकसान का सर्वे किया गया है और न ही पीड़ित परिवार को किसी प्रकार की तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई है। इससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सिहार गांव और आसपास का क्षेत्र पहले भी जंगली हाथियों की आवाजाही से प्रभावित रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अतीत में हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद हाथियों के विचरण को रोकने या ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। लगातार हाथियों की मौजूदगी के कारण किसान खेती करने और ग्रामीण रात के समय घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि प्रभावित परिवार के नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और शासन के नियमानुसार शीघ्र मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने, प्रभावित गांवों में वन अमले की नियमित तैनाती करने तथा ग्रामीणों को समय पर अलर्ट करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी बड़ी जनहानि या संपत्ति का नुकसान हो सकता है।
फिलहाल प्रभावित परिवार प्रशासन और वन विभाग से सहायता की उम्मीद लगाए बैठा है। वहीं ग्रामीण चाहते हैं कि हाथियों की बढ़ती गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को बार-बार इस तरह की घटनाओं का सामना न करना पड़े।