कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं ग्रामीण समुदाय को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा समाज को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को गति देना था। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रकार के नशे—जैसे तंबाकू, शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों—से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में बताया कि नशा केवल एक व्यक्ति तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। नशे की आदत से न केवल स्वास्थ्य बिगड़ता है, बल्कि पढ़ाई, रोजगार और सामाजिक संबंधों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि युवा अवस्था में लिए गए गलत निर्णय पूरे जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई। सभी छात्र-छात्राओं ने यह संकल्प लिया कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने परिवार, मित्रों एवं आसपास के लोगों को भी नशे के विरुद्ध जागरूक करेंगे। साथ ही उन्हें यह संदेश दिया गया कि सकारात्मक सोच, खेल, शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियां नशे से दूर रहने का सबसे मजबूत माध्यम हैं।
इसी क्रम में जिले के विशेष बैगा बाहुल्य क्षेत्र के ग्राम छिंदपुर में भी नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां ग्रामीणों को सरल एवं सहज भाषा में नशे से होने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। उन्हें यह बताया गया कि नशा व्यक्ति की कार्यक्षमता को कमजोर करता है और परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
ग्रामीणों को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने, नियमित परिश्रम, खेलकूद और सामुदायिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए नशा त्यागने एवं अपने गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, नशा मुक्त भारत अभियान के वालेंटियर श्री चंद्रकांत यादव एवं सुश्री ज्योति साहू सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि समाज में नशे के खिलाफ निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा और युवाओं को सही मार्गदर्शन देकर उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थितजनों ने यह विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के जागरूकता एवं शपथ कार्यक्रमों से न केवल विद्यार्थियों में बल्कि ग्रामीण समुदाय में भी नशे के प्रति चेतना विकसित होगी और धीरे-धीरे एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं नशामुक्त समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।