गरियाबंद जिले के Devbhog क्षेत्र में किडनी रोग लंबे समय से एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती रहा है। दूरस्थ एवं आदिवासी अंचल होने के कारण मरीजों को पहले डायलिसिस जैसी आवश्यक सुविधा के लिए रायपुर अथवा अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय, धन और श्रम तीनों की बड़ी समस्या उत्पन्न होती थी। शासन की पहल और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य तंत्र को सशक्त करने के प्रयासों से अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है।
Community Health Center Devbhog में डायलिसिस सेवाएं नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं, जिसका सीधा लाभ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 10 दिनों में यहां कुल 95 डायलिसिस सत्र आयोजित किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रतिदिन औसतन लगभग 9 से 10 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
लगातार और समयबद्ध उपचार व्यवस्था से मरीजों की स्थिति पर नियमित चिकित्सकीय निगरानी संभव हो पा रही है। चिकित्सकीय टीम द्वारा प्रत्येक मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन कर आवश्यकतानुसार उपचार किया जा रहा है, जिससे जटिलताओं की संभावना भी कम हो रही है।
किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस एक अत्यंत आवश्यक और जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसे लंबे समय तक नियमित रूप से कराना जरूरी होता है। इस संदर्भ में Chhattisgarh सरकार द्वारा शासकीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य तंत्र की एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहल मानी जा रही है। इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों के लिए इलाज की राह काफी आसान हो गई है।
प्रदेश स्तर पर भी डायलिसिस सेवाओं के विस्तार, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता तथा प्रशिक्षित चिकित्सा दल की सक्रियता के कारण उपचार व्यवस्था अधिक प्रभावी बन रही है। स्वास्थ्य विभाग अब केवल उपचार तक सीमित न रहकर मरीजों की समय पर पहचान, नियमित जांच, परामर्श तथा सतत उपचार प्रणाली पर विशेष ध्यान दे रहा है।
देवभोग में केवल 10 दिनों के भीतर 95 डायलिसिस सत्रों का सफल संचालन इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचने लगी हैं। यह निःशुल्क डायलिसिस योजना न केवल मरीजों के लिए राहत का माध्यम बनी है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक संबल साबित हो रही है।
डायलिसिस सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, मशीनों के नियमित रखरखाव तथा मरीजों की सतत निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने और किडनी रोग के प्रति जागरूक रहने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि बीमारी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही हो सके और गंभीर स्थितियों से समय रहते बचाव किया जा सके।