अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और तटीय रक्षा प्रणालियों पर हमले किए, जबकि जवाब में ईरान ने बहरीन सहित क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के बीच क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए हैं, जबकि ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ग्रेटर टुंब द्वीप पर लगभग 90 मिनट तक चले अभियान में तटीय रक्षा प्रणालियों, क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्रों और मिसाइल लॉन्च साइटों पर सटीक हमले किए। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका उपयोग होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा रहा था।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई केवल ग्रेटर टुंब तक सीमित नहीं रही। ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमले किए गए। इसके अलावा खर्ग द्वीप की ओर बढ़ रहे एक तेल टैंकर को अमेरिकी सेना ने चेतावनी के बाद मिसाइल हमले से निष्क्रिय करने की जानकारी दी है।
ईरान ने भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देते हुए बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने का दावा किया है। ईरानी सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसके अभियान अमेरिकी सैन्य ढांचे को निशाना बनाने पर केंद्रित हैं। हालांकि इन दावों के स्वतंत्र सत्यापन की पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस बीच विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी वायुसेना के टैंकर विमानों और निगरानी विमानों की मध्य पूर्व में बढ़ती गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ने से व्यापक संघर्ष की आशंका भी जताई जा रही है।
संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अमेरिकी सैन्य क्षमता को और अधिक सशक्त बनाने के लिए रक्षा निवेश बढ़ाया जाएगा।
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील कर रहा है, क्योंकि इस संघर्ष का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।