सुकमा में छात्रावासों की सीट बढ़ाने की मांग, बस्तरिया राज छात्र मोर्चा ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

सुकमा में बस्तरिया राज छात्र मोर्चा ने आदिवासी छात्रों के लिए छात्रावासों में सीटों की कमी और शिक्षा सुविधाओं के अभाव को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रावासों की सीटें बढ़ाने, स्थायी भवन निर्माण और सभी पात्र छात्रों को प्रवेश देने की मांग की है।

Jul 1, 2026 - 17:19
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सुकमा में छात्रावासों की सीट बढ़ाने की मांग, बस्तरिया राज छात्र मोर्चा ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी, सुकमा l सुकमा जिले में आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा और छात्रावास सुविधाओं की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। बस्तरिया राज छात्र मोर्चा ने जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए छात्रावासों में सीटों की भारी कमी, स्थायी भवनों के अभाव और प्रवेश प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर चिंता जताई। संगठन ने कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

मोर्चा के अनुसार सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल जिले में पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में केवल 50 सीटें स्वीकृत हैं, जो जिले की वास्तविक आवश्यकता की तुलना में बेहद कम हैं। संगठन का कहना है कि सीमित सीटों के कारण दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक आदिवासी छात्र-छात्राएं छात्रावास की सुविधा से वंचित हो रहे हैं और कई को मजबूरी में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ रही है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि जिला मुख्यालय स्थित पोस्ट मैट्रिक बालक एवं कन्या छात्रावासों की क्षमता 50 से बढ़ाकर 200 सीट की जाए। साथ ही इन छात्रावासों के लिए स्थायी भवनों का निर्माण कराया जाए, क्योंकि वर्तमान में इनका संचालन अस्थायी भवनों में किया जा रहा है। इसके अलावा छिंदगढ़, कोन्टा, गादीरास, तोंगपाल, दोरनापाल और गोलापल्ली स्थित छात्रावासों में भी सीटों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 150 करने की मांग रखी गई है।

संगठन ने प्री मैट्रिक छात्रावासों में भी 100-100 सीटें स्वीकृत करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में छात्रावासों के पूर्ण होने का हवाला देकर नए छात्रों के आवेदन तक स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। इससे अनेक पात्र छात्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। मोर्चा ने मांग की कि सभी नवीन छात्रों को छात्रावास में प्रवेश दिया जाए और किसी भी विद्यार्थी को केवल सीटों की कमी के कारण शिक्षा से दूर न किया जाए।

बस्तरिया राज छात्र मोर्चा ने यह आरोप भी लगाया कि सुकमा जिले के विद्यार्थियों को उनकी पसंद के विद्यालयों में प्रवेश देने से रोका जा रहा है। ब्लॉक आधारित प्रवेश व्यवस्था का हवाला देकर कई मामलों में सीटें खाली होने के बावजूद छात्रों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। संगठन ने इसे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पहले से पिछड़े सुकमा जिले में मूलभूत शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है। यदि छात्रावासों की क्षमता नहीं बढ़ाई गई और छात्रों को समय पर प्रवेश नहीं मिला तो बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएंगे। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से छात्र हित में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो छात्रों के हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।