फेसबुक पर वेट लॉस के नाम पर 80 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट बनकर महिलाओं को बनाया शिकार

गुजरात पुलिस ने फेसबुक पर वजन कम करने के विज्ञापन के जरिए महिलाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले हाईटेक साइबर रैकेट का खुलासा किया है। गिरोह में 150 युवतियां हेल्थ एक्सपर्ट और 20 युवक फर्जी डॉक्टर बनकर लोगों को झांसे में लेते थे। पुलिस के अनुसार देशभर में करीब 80 करोड़ रुपये की ठगी की गई। मामले की जांच जारी है।

Jul 1, 2026 - 17:03
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फेसबुक पर वेट लॉस के नाम पर 80 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट बनकर महिलाओं को बनाया शिकार

UNITED NEWS OF ASIA. सूरत। गुजरात पुलिस ने फेसबुक पर वजन कम करने के आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार यह हाईटेक नेटवर्क देशभर की महिलाओं को बिना एक्सरसाइज और बिना डाइटिंग के 30 दिनों में वजन कम करने का दावा कर अपने जाल में फंसाता था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने कथित तौर पर करीब 80 करोड़ रुपये की ठगी की है।

सूरत साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक पूरे नेटवर्क का संचालन गुरुग्राम स्थित एक कॉल सेंटर से किया जा रहा था। बाहर से यह एक हेल्थ एंड वेलनेस कंपनी के रूप में संचालित होती थी, लेकिन अंदर लगभग 170 लोगों की टीम साइबर ठगी में लगी हुई थी। इनमें करीब 150 युवतियां स्वयं को हेल्थ एक्सपर्ट या डॉक्टर की सहायक बताकर लोगों से संपर्क करती थीं, जबकि लगभग 20 युवक फर्जी डॉक्टर बनकर मेडिकल सलाह देते थे।

पुलिस के अनुसार फेसबुक पर वजन कम करने का विज्ञापन देखने के बाद जैसे ही कोई व्यक्ति उस पर क्लिक करता था, कुछ ही मिनटों में उसे व्हाट्सएप कॉल और संदेश आने शुरू हो जाते थे। टेलीकॉलर पहले विश्वास जीतती थीं और बाद में कॉल को कथित डॉक्टर के पास ट्रांसफर कर देती थीं। आरोपी मेडिकल शब्दावली का इस्तेमाल करते हुए खुद को विशेषज्ञ चिकित्सक बताते थे और पीड़ितों को महंगे उपचार पैकेज खरीदने के लिए प्रेरित करते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ितों के नाम से कथित मेडिकल प्रोफाइल, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), मेटाबॉलिज्म रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे ताकि उन्हें उपचार वास्तविक लगे। इसके बाद अलग-अलग चरणों में दवाओं और किट की बिक्री की जाती थी। हर बार यह दावा किया जाता था कि यही अंतिम चरण है और जल्द ही परिणाम दिखाई देंगे। इसी प्रक्रिया में कई लोगों से लाखों रुपये वसूल लिए गए।

पुलिस का कहना है कि गिरोह अधिकांश लेन-देन नकद में करता था। आरोपी विभिन्न शहरों में जाकर दवा के पैकेट देने के बहाने नकदी एकत्र करते थे, जिससे बैंकिंग रिकॉर्ड में लेन-देन कम दिखाई दे।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब सूरत की एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उससे पांच महीनों में लगभग 1.77 करोड़ रुपये लिए गए और बाद में 81.50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग करते हुए कथित दवा के दुष्प्रभाव का डर दिखाया गया। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और नकद लेने पहुंचे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर गुरुग्राम स्थित कॉल सेंटर में छापा मारकर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया।

पुलिस ने मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार इस साइबर गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले चमत्कारी स्वास्थ्य दावों और बिना प्रमाण वाले विज्ञापनों पर भरोसा न करें तथा किसी भी भुगतान से पहले संबंधित सेवा की सत्यता की जांच अवश्य करें।