सरकारी स्कूल को उत्कृष्ट बनाने के लिए प्रधान पाठक ने दिखाई मिसाल, वेतन का 15 प्रतिशत बच्चों और शाला विकास पर कर रहे खर्च

दुर्ग जिले के शासकीय प्राथमिक शाला चिखला के प्रधान पाठक दिनेश साहू कई वर्षों से अपने वेतन का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा विद्यार्थियों और विद्यालय के विकास पर खर्च कर रहे हैं। बच्चों को निःशुल्क अध्ययन सामग्री, गणवेश सामग्री, अतिथि शिक्षक, न्यौता भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराकर वे सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

Jul 1, 2026 - 17:41
 0  3
सरकारी स्कूल को उत्कृष्ट बनाने के लिए प्रधान पाठक ने दिखाई मिसाल, वेतन का 15 प्रतिशत बच्चों और शाला विकास पर कर रहे खर्च

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग जिले के शासकीय प्राथमिक शाला चिखला, संकुल केंद्र हिर्री में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिल रही है। विद्यालय के प्रधान पाठक दिनेश साहू पिछले कई वर्षों से अपने वेतन का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा स्वेच्छा से विद्यार्थियों और विद्यालय के विकास पर खर्च कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकारी विद्यालयों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना और अभिभावकों का विश्वास सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर मजबूत करना है।

दिनेश साहू द्वारा विद्यालय में अध्ययनरत 17 विद्यार्थियों को निःशुल्क जूते, मोजे, कॉपी, पेन तथा पहाड़ा चार्ट उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा सभी बच्चों को टाई, बेल्ट और परिचय पत्र भी निःशुल्क दिए जाते हैं, ताकि विद्यार्थियों में अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास हो सके। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

विद्यालय की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्होंने अपने निजी खर्च से दो अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी की है। इन शिक्षकों पर प्रतिमाह लगभग छह हजार रुपये का व्यय किया जाता है। इससे बच्चों को नियमित और बेहतर शिक्षण उपलब्ध हो रहा है तथा विद्यालय का शैक्षणिक स्तर भी मजबूत हुआ है।

विद्यालय में बच्चों के जन्मदिन मनाने की विशेष परंपरा भी शुरू की गई है। विद्यार्थियों का जन्मदिन केक काटकर मनाया जाता है, जिससे बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और उत्साह बढ़ता है। सप्ताह में तीन से चार दिन न्यौता भोजन का आयोजन किया जाता है तथा राष्ट्रीय पर्वों पर ग्रामवासियों के लिए भी नाश्ते की व्यवस्था की जाती है। दीपावली के अवसर पर विद्यालय में कार्यरत सफाई कर्मी और रसोइया का सम्मान करते हुए उन्हें साड़ी भेंट की जाती है।

इस वर्ष शाला प्रवेश उत्सव के दौरान बच्चों के लिए जूता वितरण, न्यौता भोजन, अतिथि सम्मान और ग्रामीणों के भोजन सहित विभिन्न गतिविधियों पर लगभग 28 हजार रुपये खर्च किए गए। वहीं पिछले वर्ष विद्यार्थियों को लगभग 10 हजार रुपये मूल्य के लोवर और टी-शर्ट वितरित किए गए थे। आगामी शैक्षणिक सत्र में विद्यालय परिसर में लगभग 10 हजार रुपये की लागत से एक सुंदर उद्यान विकसित करने की भी योजना बनाई गई है।

दिनेश साहू का योगदान केवल अपनी शाला तक सीमित नहीं है। उन्होंने संकुल की अन्य शालाओं में भी निःशुल्क आई-कार्ड, बेल्ट, स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर सेट, फोटोकॉपी मशीन, ट्यूबलाइट और सीलिंग फैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग दिया है। इसके साथ ही संकुल स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन कर शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया है।

दिनेश साहू का कहना है कि उनका लक्ष्य सरकारी विद्यालयों को ऐसा वातावरण देना है, जहां अभिभावक बिना किसी संकोच के अपने बच्चों का प्रवेश कराएं। उनका विश्वास है कि यदि शिक्षक समर्पण के साथ कार्य करें और समाज का सहयोग मिले, तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बन सकते हैं। उनकी यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक सहभागिता, सेवा भावना और समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है।