बालोद जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई एक वर्षीय मासूम की जान, टंकी में डूबने के बाद मिला नया जीवन
बालोद जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने पानी की टंकी में डूबने से गंभीर रूप से बीमार हुए एक वर्षीय बालक का सफल उपचार कर उसकी जान बचाई। तीन दिनों तक चले इलाज के बाद बालक पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट गया।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l जिला चिकित्सालय बालोद के डॉक्टरों ने त्वरित उपचार और बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन का परिचय देते हुए एक वर्षीय मासूम बच्चे की जान बचाने में सफलता हासिल की है। घर में पानी की टंकी में डूबने से गंभीर रूप से बीमार हुए बालक का समय रहते उपचार शुरू किया गया, जिसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट गया।
जानकारी के अनुसार ग्राम कमरौद निवासी हेमराज का एक वर्षीय पुत्र कुणाल 26 जून 2026 को घर में खेलते समय अचानक पानी की टंकी में गिर गया। परिजनों की नजर जब तक बच्चे पर पड़ी, तब तक वह पानी में डूब चुका था और उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी। घबराए परिजन बिना समय गंवाए बच्चे को तत्काल जिला चिकित्सालय बालोद लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. रविन्द्र कुमार श्रीमाली के नेतृत्व में आपातकालीन चिकित्सा टीम ने तुरंत उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जीवन रक्षक उपचार देकर बच्चे की स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद उसे बाल रोग वार्ड में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में रखा गया।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार अगले तीन दिनों तक बच्चे का लगातार उपचार किया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराई। उपचार का सकारात्मक परिणाम सामने आया और बच्चे की तबीयत में तेजी से सुधार होने लगा। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद 29 जून 2026 को कुणाल को पूरी तरह स्वस्थ घोषित करते हुए अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मासूम बच्चे के स्वस्थ होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों ने जिला चिकित्सालय बालोद की त्वरित चिकित्सा व्यवस्था, डॉक्टरों की संवेदनशीलता और नर्सिंग स्टाफ की सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. रविन्द्र कुमार श्रीमाली सहित उपचार में शामिल पूरी चिकित्सा टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिले इलाज के कारण उनके बच्चे को नया जीवन मिला है।
स्थानीय लोगों ने भी जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के इस प्रयास की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सकों की तत्परता गंभीर परिस्थितियों में लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।
चिकित्सकों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि छोटे बच्चों को घर में पानी की टंकियों, कुओं, बाल्टियों या अन्य जल स्रोतों के आसपास अकेला न छोड़ें। बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे स्थानों को हमेशा ढंककर रखें और लगातार निगरानी रखें, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके। समय पर उपचार और सतर्कता से कई गंभीर हादसों को टाला जा सकता है।