पुलिया मरम्मत में गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने पंचायत पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत कोसमकानी में पुलिया मरम्मत कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च दिखाने के बावजूद मरम्मत कार्य अधूरा और गुणवत्ताहीन है। एक पुलिया की स्थिति पहले जैसी बनी हुई है, जबकि दूसरी पुलिया का मरम्मत कार्य केवल कागजों में दर्शाए जाने का आरोप लगाया गया है।

Jun 28, 2026 - 11:36
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पुलिया मरम्मत में गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने पंचायत पर लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसमकानी में पुलिया मरम्मत कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने पंचायत पर मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और वे पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार उपरपीटा से केंदुबन मार्ग पर स्थित दो पुलियों की मरम्मत के लिए पंचायत द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है। पंचायत के दस्तावेजों में 15वें वित्त आयोग की राशि से 99 हजार 850 रुपये व्यय दर्शाया गया है। हालांकि, मौके पर स्थिति इससे अलग नजर आती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहली पुलिया के निचले हिस्से में कोई प्रभावी मरम्मत नहीं हुई है और वह पहले की तरह क्षतिग्रस्त दिखाई दे रही है। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकारी राशि का उपयोग किस कार्य में किया गया।

ग्रामीणों ने दूसरी पुलिया को लेकर और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत ने सरकारी अभिलेखों में मरम्मत कार्य पूरा होना दर्शा दिया है, जबकि वास्तविकता में पुलिया जर्जर अवस्था में है। पुलिया की खराब स्थिति के कारण राहगीरों और ग्रामीणों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिया की उचित मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के दौरान बड़ी दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

मामले में पंचायत सचिव केशरी यादव ने स्वीकार किया कि पुलिया को लेकर समस्या है और जल्द ही आवश्यक मरम्मत कराने का प्रयास किया जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर सरपंच कार्तिक यादव अपनी पहुंच का हवाला देते हुए मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना पंचायत की जिम्मेदारी है। यदि सरकारी राशि खर्च होने के बाद भी आधारभूत सुविधाओं की स्थिति नहीं सुधरती, तो इससे शासन की योजनाओं पर भी सवाल उठते हैं।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे और यदि किसी प्रकार की वित्तीय या निर्माण संबंधी अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।