पीएम आवास योजना में कथित धांधली का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
सक्ती जिले के ग्राम पंचायत रगजा में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर एक ही परिवार के पति-पत्नी के नाम अलग-अलग आवास पंजीयन, अपात्र लोगों के नाम जोड़ने और आवास के नाम पर 2 से 3 हजार रुपये मांगने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच, कथित फर्जी पंजीयन निरस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. जीके कुर्रे, सक्ती l जिले के ग्राम पंचायत रगजा में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, ग्राम पंचायत में एक ही परिवार के पति-पत्नी के नाम से अलग-अलग आवास का पंजीयन किए जाने के मामले सामने आए हैं। ज्ञापन में ऐसे छह मामलों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है।
आवास के नाम पर राशि मांगने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर कुछ लोगों से 2 हजार से 3 हजार रुपये तक की राशि मांगी गई। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
अपात्र लोगों के नाम जोड़ने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरपंच और सचिव की कथित मिलीभगत से नियमों के विपरीत कई अपात्र लोगों के नाम योजना में जोड़े गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अपात्र लोगों को योजना में शामिल किया गया है, तो इससे वास्तविक पात्र हितग्राही आवास के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पंचायत स्तर पर आवास योजना से जुड़े सभी पंजीयन और दस्तावेजों की जांच की जाए, ताकि पात्रता की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
फर्जी पंजीयन निरस्त करने की मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कथित फर्जी या नियमविरुद्ध पंजीयन की जांच कर उन्हें निरस्त करने की मांग की है। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति सामने आ सकेगी।