वट्टी कुंदा के 19 मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, शिक्षा और संस्कृति संरक्षण का बना प्रेरक उदाहरण
कोंडागांव जिले के चिचाड़ी (फरसगांव) में जय बुढ़ालपेन वट्टी कुंदा समिति ने शिक्षा को बढ़ावा देने और संस्कृति संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित "समाज का गौरव सम्मान समारोह" में 19 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। समिति ने सामूहिक बचत और सहयोग की अनूठी पहल से शिक्षा को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेंद्र मांडवी, कांकेर l कोंडागांव जिले के चिचाड़ी (फरसगांव) स्थित जय बुढ़ालपेन वट्टी कुंदा समिति ने शिक्षा, सामाजिक सहयोग और संस्कृति संरक्षण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए 19 मेधावी विद्यार्थियों का भव्य सम्मान किया। "समाज का गौरव सम्मान समारोह" के माध्यम से समिति ने यह संदेश दिया कि संगठित प्रयास और छोटी-छोटी बचत भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
समिति की स्थापना वर्ष 2015 में इस संकल्प के साथ की गई थी कि वट्टी कुंदा का प्रत्येक बच्चा शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े और समाज का नाम रोशन करे। इसी उद्देश्य से समिति के सदस्यों ने स्वैच्छिक सहयोग योजना शुरू की, जिसके तहत बच्चों, युवाओं, व्यवसायियों और कर्मचारियों से मासिक अंशदान एकत्र किया जाने लगा। वर्षों के इस अनुशासित प्रयास से समिति ने एक लाख 26 हजार 782 रुपये की पूंजी तैयार की, जिसका उपयोग शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
समिति की इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संचित राशि को सुरक्षित रखते हुए ऋण के रूप में उपयोग किया जाता है और उससे प्राप्त ब्याज से शिक्षा संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी ब्याज राशि से वर्ष 2026 का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जो आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।
वर्ष 2025 में समिति ने पहली बार 12 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित किया था। उस पहल से प्रेरित होकर इस वर्ष सम्मानित विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 19 हो गई, जिनमें 4 बालक और 15 बालिकाएं शामिल हैं। यह उपलब्धि क्षेत्र में शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और बालिका शिक्षा को मिल रहे प्रोत्साहन को दर्शाती है।
समारोह में 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा ग्राम पंचायत चिचाड़ी के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों तथा बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले छात्रों को भी प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और गोंडी भाषा अध्ययन पुस्तक भेंट की गई।
कार्यक्रम में शिक्षा के साथ मातृभाषा और संस्कृति के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजकर रखने का आह्वान किया। बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा गया कि लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने से सफलता अवश्य मिलती है।
समारोह में डॉ. जीवन लाल सलाम, डॉ. चैनू नयताम तथा तिरूमाल समरथ वट्टी सहित अनेक अतिथियों और समाज के वरिष्ठजनों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने "थोड़ा कम खाएं, लेकिन बच्चों को अवश्य पढ़ाएं" और "नशे से दूर रहें, शिक्षा को जीवन का आधार बनाएं" जैसे प्रेरक संदेश भी दिए।
वट्टी कुंदा समिति का यह सामूहिक प्रयास आज शिक्षा, आर्थिक अनुशासन और सामाजिक एकजुटता का प्रेरक मॉडल बन चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद समाज ने यह साबित किया है कि यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और सभी मिलकर कार्य करें तो शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी का उज्ज्वल भविष्य तैयार किया जा सकता है।