बिहार एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच हो, कानून से ऊपर नहीं कोई: अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने बिहार में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए इसकी उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

Jun 22, 2026 - 11:32
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बिहार एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच हो, कानून से ऊपर नहीं कोई: अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बिहार में हाल ही में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। जारी प्रेस एवं सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा कि कानून के शासन और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायिक प्रक्रिया सर्वोपरि होती है और किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत ही दोषी ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना है, न कि स्वयं न्यायिक भूमिका निभाना।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में हुई कथित मुठभेड़ के संबंध में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो मामले को संदिग्ध बनाते हैं। उनके अनुसार यदि किसी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित मामले PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने पुलिस मुठभेड़ों की जांच के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच, आवश्यक कानूनी कार्रवाई तथा मजिस्ट्रेट जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देश भी ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और जवाबदेही की आवश्यकता पर बल देते हैं। यदि किसी मुठभेड़ में मौत होती है तो उसके सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है।

मनोज सिंह ठाकुर ने मांग की कि मामले में उच्च न्यायालय अथवा सर्वोच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेकर पूरे प्रकरण की निगरानी में जांच सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि कानून की विश्वसनीयता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए जवाबदेही आवश्यक है।

अधिवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय व्यवस्था की मजबूती ही नागरिक अधिकारों की सबसे बड़ी गारंटी है। इसलिए किसी भी विवादित पुलिस कार्रवाई की पारदर्शी जांच और न्यायिक परीक्षण आवश्यक है, ताकि सत्य सामने आ सके और कानून के शासन में जनता का विश्वास बना रहे।