कुत्ता देखो, रिपोर्ट बनाओ… पढ़ाई कब? विधायक ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाने पर सरकार पर निशाना साधा

खैरागढ़ विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन ने छत्तीसगढ़ सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय गैर-शैक्षणिक कार्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं। इससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा का स्तर गिर रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल शिक्षकों को इन कार्यों से मुक्त करे और संविधानसम्मत शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे।

Dec 6, 2025 - 16:18
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कुत्ता देखो, रिपोर्ट बनाओ… पढ़ाई कब? विधायक ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझाने पर सरकार पर निशाना साधा

 UNITED NEWS OF ASIA.मनोहर सेन, खैरागढ़। विधायक प्रतिनिधि मनराखन देवांगन ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि संविधान में शिक्षा को मूल अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया गया है, लेकिन वर्तमान सरकार की नीतियाँ इस अधिकार को कमजोर कर रही हैं। सरकार ने शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के बजाय कुत्ता निगरानी, एसआईआर रिपोर्टिंग, सर्वे, गैर-शैक्षणिक कार्यों और चुनावी ड्यूटी में उलझा दिया है।

उन्होंने कहा कि जब शिक्षक ही कक्षा में नहीं रहेंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार स्वयं चाहती है कि सरकारी विद्यालयों के बच्चे पढ़ाई से दूर रहें, ताकि शिक्षा का स्तर गिरता जाए और निजी स्कूलों का कारोबार फलता-फूलता रहे।

मनराखन देवांगन ने कहा सरकारी स्कूल के बच्चे स्कूल पहुँचते हैं लेकिन शिक्षक लगातार प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। नतीजा यह है कि शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है और संविधान प्रदत्त शिक्षा का अधिकार कागज़ों तक सीमित रह गया है। दूसरी ओर, प्राइवेट स्कूल मनमानी फीस, ड्रेस व अन्य मदों के नाम पर आम आदमी की जेब काट रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी बैठी है।

उन्होंने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि यह व्यवस्था बच्चों को अशिक्षा की ओर धकेल रही है। शिक्षित समाज सवाल पूछता है, और शायद इसी डर से सरकार ऐसी नीतियाँ बना रही है ताकि बच्चे अनपढ़ रहें और राजनीतिक कार्यक्रमों में सिर्फ झंडा उठाने तक सीमित रह जाए।

मनराखन देवांगन ने कहा कि भाजपा सरकार अब तक शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ठोस कार्य नहीं कर सकी है। सरकार जनता को बस झुनझुना पकड़ाने का काम कर रही है, जबकि संविधान कहता है कि राज्य का प्रथम कर्तव्य नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन आज हालात विपरीत हैं— स्कूलों में शिक्षक नहीं, नीतियों में स्पष्टता नहीं और बच्चों का भविष्य अधर में है।

उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करे, शिक्षा नीति की समीक्षा करे और संविधानसम्मत शिक्षा व्यवस्था को पुनर्स्थापित करे।