शिक्षक की विदाई पर छलके बच्चों के आंसू, गुरु-शिष्य के रिश्ते की भावुक तस्वीर आई सामने

गौरेला ब्लॉक के प्राथमिक शाला केंवची में प्रधान पाठक नागेंद्र सिंह ठाकुर की विदाई के दौरान छात्र-छात्राएं भावुक हो गए। दो साल की पदस्थापना के बाद उनकी नवीन पदस्थापना पेंड्रा ब्लॉक के प्राथमिक शाला भर्रापारा में हुई है। विदाई के दौरान बच्चों की नम आंखों ने शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बने आत्मीय रिश्ते को बयां किया।

Aug 11, 2026 - 17:46
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शिक्षक की विदाई पर छलके बच्चों के आंसू, गुरु-शिष्य के रिश्ते की भावुक तस्वीर आई सामने

UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, गौरेला पेंड्रा मरवाही l सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर इन दिनों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। तस्वीर में न कोई बड़ा आयोजन है और न ही कोई मंच, लेकिन एक शिक्षक को विदा करते बच्चों की नम आंखें गुरु-शिष्य के रिश्ते की गहराई को बयां कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला ब्लॉक स्थित प्राथमिक शाला केंवची में प्रधान पाठक के पद पर करीब दो वर्षों से पदस्थ नागेंद्र सिंह ठाकुर की नवीन पदस्थापना पेंड्रा ब्लॉक के प्राथमिक शाला भर्रापारा में हुई है।

जब नागेंद्र सिंह ठाकुर अपने पुराने विद्यालय से विदा होने लगे तो स्कूल का माहौल भावुक हो गया। जिस विद्यालय में दो वर्षों तक बच्चों की पढ़ाई, खेल और रोजमर्रा की गतिविधियों के बीच उनका समय बीता, उसी विद्यालय से विदाई के समय छात्र-छात्राओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। कई बच्चे अपने शिक्षक को लगातार निहारते रहे, जबकि कुछ भावनाओं पर काबू नहीं रख सके।

बच्चों की भावुकता यह बताने के लिए काफी थी कि नागेंद्र सिंह ठाकुर ने उनके साथ केवल शिक्षक और विद्यार्थी का औपचारिक रिश्ता नहीं बनाया था। उन्होंने बच्चों को पढ़ाई के साथ अनुशासन, व्यवहार और संस्कार की सीख भी दी। यही वजह रही कि उनके स्थानांतरण की खबर बच्चों के लिए किसी अपने से दूर होने जैसी बन गई।

विद्यालय से विदा होते समय बच्चों का अपने शिक्षक के प्रति यह लगाव आसपास मौजूद लोगों के लिए भी भावुक कर देने वाला रहा। तस्वीरों में बच्चों की नम आंखें और शिक्षक के प्रति उनका सम्मान गुरु-शिष्य परंपरा की उस भावना को सामने लाता है, जिसमें शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है।

प्रधान पाठक नागेंद्र सिंह ठाकुर की नई पदस्थापना अब पेंड्रा ब्लॉक के प्राथमिक शाला भर्रापारा में हुई है। वहीं केंवची प्राथमिक शाला में उनके साथ बिताए समय की यादें बच्चों और विद्यालय से जुड़े लोगों के बीच बनी रहेंगी। दो साल का यह सफर भले ही अवधि के लिहाज से छोटा रहा हो, लेकिन बच्चों के साथ बने आत्मीय संबंध ने इसे यादगार बना दिया।

आज के समय में जब शिक्षक और विद्यार्थी के रिश्ते को कई बार केवल कक्षा, किताब और परीक्षा तक सीमित समझा जाता है, केंवची प्राथमिक शाला की यह तस्वीर एक अलग कहानी कहती है। यह तस्वीर बताती है कि जब शिक्षक बच्चों के साथ अपनापन और संवेदनशीलता के साथ जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता।

एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं होती कि उसके विद्यार्थी कितनी अच्छी पढ़ाई करते हैं, बल्कि यह भी होती है कि विदाई के समय विद्यार्थी उसे कितने सम्मान और अपनत्व के साथ याद करते हैं। नागेंद्र सिंह ठाकुर की विदाई के दौरान बच्चों की आंखों से छलके आंसू इसी भाव को व्यक्त करते नजर आए।

केंवची प्राथमिक शाला से नागेंद्र सिंह ठाकुर की विदाई ने गुरु-शिष्य के रिश्ते की एक ऐसी भावुक तस्वीर छोड़ दी है, जो लंबे समय तक बच्चों और स्कूल से जुड़े लोगों की स्मृतियों में बनी रहेगी। उनकी नई पदस्थापना के साथ एक नया अध्याय शुरू होगा, लेकिन केंवची के बच्चों के साथ बिताए समय और उनके बीच बना आत्मीय रिश्ता इस विदाई को हमेशा खास बनाए रखेगा।