अयोध्या से दर्शन कर लौटे तीर्थ यात्रियों का कवर्धा में उपमुख्यमंत्री कार्यालय में भव्य स्वागत
अयोध्या धाम से श्रीरामलला के दर्शन कर लौटे तीर्थ यात्रियों का कवर्धा स्थित उपमुख्यमंत्री कार्यालय में जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं को श्रीफल, पुष्पमाला एवं वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। अयोध्या धाम से श्रीरामलला के पावन दर्शन कर वापस लौटे तीर्थ यात्रियों का आज कवर्धा स्थित उपमुख्यमंत्री कार्यालय में जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों द्वारा भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालु तीर्थ यात्रियों को श्रीफल, पुष्पमाला एवं वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देशानुसार अयोध्या धाम से लौटने वाले प्रत्येक तीर्थ यात्री दल का सम्मानपूर्वक स्वागत किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि धार्मिक यात्रा कर लौटे श्रद्धालुओं को सम्मान, आत्मीयता एवं सहयोग की अनुभूति हो, ताकि वे अपने आध्यात्मिक अनुभवों को सकारात्मक स्मृतियों के रूप में संजो सकें।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों ने तीर्थ यात्रियों से आत्मीय संवाद किया तथा उनकी यात्रा के अनुभवों के बारे में जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान तीर्थ यात्रियों ने अयोध्या धाम में श्रीरामलला के दर्शन के अपने भावनात्मक एवं आध्यात्मिक अनुभव साझा किए। श्रद्धालुओं ने कहा कि यह यात्रा उनके जीवन का एक अविस्मरणीय क्षण रही, जिसने उन्हें आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान की।
तीर्थ यात्रियों ने शासन-प्रशासन द्वारा किए गए इस सम्मान एवं स्वागत की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि इस प्रकार का आत्मीय व्यवहार उन्हें विशेष सम्मान का अनुभव कराता है। उन्होंने इस व्यवस्था एवं पहल के लिए माननीय उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्षईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, सिख गुरुद्वारा प्रबंध समिति के अध्यक्ष गुरुमुख सिंह अरोरा, नितेश अग्रवाल, जनपद पंचायत कवर्धा अध्यक्ष प्रतिनिधि गनपत बघेल, नरेन्द्र मानिकपुरी, सतविंदर पाहुजा तथा वेदकुमारी सहित समाज के अनेक वरिष्ठजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि शासन की इस पहल से तीर्थ यात्रियों में संतोष और प्रसन्नता का भाव देखा जा रहा है। यह स्वागत कार्यक्रम न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान करता है, बल्कि सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है।