सुकमा में कांग्रेस को बड़ी मजबूती, सीपीआई के 114 ग्रामीण कांग्रेस में शामिल

सुकमा जिले की केरातोग पंचायत के मारीपारा और माटापारा में 114 ग्रामीणों ने सीपीआई छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में नए सदस्यों का स्वागत किया गया। कांग्रेस ने इसे संगठन की मजबूती बताया, जबकि हरीश कवासी ने क्षेत्र में विकास, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर राज्य सरकार की आलोचना की।

Jul 4, 2026 - 11:03
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सुकमा में कांग्रेस को बड़ी मजबूती, सीपीआई के 114 ग्रामीण कांग्रेस में शामिल

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी, सुकमा l सुकमा जिले की स्थानीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। केरातोग पंचायत के मारीपारा और माटापारा गांवों के 114 ग्रामीणों ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का साथ छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में सभी नए सदस्यों का कांग्रेस परिवार में स्वागत किया गया। पार्टी नेताओं ने इसे संगठन के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस के बढ़ते जनाधार का संकेत बताया।

जानकारी के अनुसार, मारीपारा के 64 और माटापारा के 50 ग्रामीणों ने कांग्रेस की सदस्यता ली। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने नए कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए संगठन को गांव-गांव तक मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भी मौजूदगी रही।

इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी ने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और विकास कार्यों की कमी से आम जनता परेशान है। उन्होंने दावा किया कि इन्हीं मुद्दों के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और ग्रामीण कांग्रेस की विचारधारा पर विश्वास जताते हुए पार्टी से जुड़ रहे हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस लगातार जनता के मुद्दों को उठाने का काम कर रही है, जिससे लोगों का भरोसा पार्टी पर बढ़ रहा है।

हरीश कवासी ने केरातोग पंचायत के मारीपारा की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में मंत्री, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों का लगातार आना-जाना होता है, लेकिन गांव की मूलभूत समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। उनका कहना था कि सड़क, पेयजल, शिक्षा और अन्य सुविधाओं की कमी से ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि विकास से वंचित ग्रामीण अब बदलाव की उम्मीद के साथ कांग्रेस का दामन थाम रहे हैं। पार्टी का कहना है कि आने वाले समय में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गांव-गांव सदस्यता अभियान चलाया जाएगा और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा।

केरातोग पंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के कांग्रेस में शामिल होने की घटना को स्थानीय राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में सीपीआई की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फिलहाल, कांग्रेस इस सदस्यता अभियान को अपनी राजनीतिक मजबूती के रूप में देख रही है। आने वाले समय में इसका असर स्थानीय संगठनात्मक गतिविधियों और क्षेत्रीय राजनीति पर किस रूप में दिखाई देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।