कवर्धा में कबीर साहिब का प्रकाश पर्व, सिख और कबीर पंथ समाज ने मिलकर दिया भाईचारे का संदेश

कवर्धा गुरुद्वारा साहिब में शिरोमणि सदगुरु कबीर साहिब का प्रकाश पर्व सिख समाज और कबीर पंथ समाज ने संयुक्त रूप से श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। कार्यक्रम में गुरबाणी कीर्तन, कथा, भजन, लंगर और आपसी सद्भाव के संदेश के साथ दोनों समाजों ने भविष्य में भी संयुक्त रूप से धार्मिक आयोजन करने का संकल्प लिया।

Jul 4, 2026 - 10:58
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कवर्धा में कबीर साहिब का प्रकाश पर्व, सिख और कबीर पंथ समाज ने मिलकर दिया भाईचारे का संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले के कवर्धा स्थित गुरुद्वारा साहिब में शिरोमणि सदगुरु कबीर साहिब का प्रकाश पर्व श्रद्धा, भक्ति और आपसी भाईचारे के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर सिख समाज और कबीर पंथ समाज ने पहली बार संयुक्त रूप से कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत गुरुद्वारा साहिब में गुरबाणी कीर्तन और धार्मिक दीवान से हुई। कबीर पंथ समाज की विभिन्न समितियों और मंडलियों के सदस्य बड़ी संख्या में कीर्तन-भजन करते हुए गुरुद्वारा साहिब पहुंचे, जहां सिख समाज की साध संगत ने पुष्प वर्षा कर उनका आत्मीय स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान दोनों समाजों के विद्वानों ने सदगुरु कबीर साहिब और गुरु नानक देव के आध्यात्मिक विचारों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि भक्ति आंदोलन के दौर में मगहर क्षेत्र में गुरु नानक देव और सदगुरु कबीर साहिब के बीच आध्यात्मिक संवाद हुआ था। कबीर साहिब की रचनाओं में से अनेक श्लोक और शब्दों को सम्मानपूर्वक गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान दिया गया है, जिनका पाठ और कीर्तन आज भी विश्वभर के गुरुद्वारों में नियमित रूप से किया जाता है।

धार्मिक प्रवचनों में संतों और विद्वानों ने बताया कि सदगुरु कबीर साहिब ने समाज को समानता, प्रेम, सत्य और मानवता का संदेश दिया। वहीं गुरु नानक देव ने भी जाति-पंथ से ऊपर उठकर सेवा, सद्भाव और ईश्वर भक्ति का मार्ग दिखाया। दोनों महापुरुषों की शिक्षाएं आज भी समाज को एकता और भाईचारे की प्रेरणा देती हैं।

कार्यक्रम में गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज गुरबाणी के शब्दों का कीर्तन, कथा और गुर इतिहास का वाचन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव से कार्यक्रम में भाग लिया और सदगुरु कबीर साहिब को नमन किया। धार्मिक आयोजन के समापन पर दोनों समाजों के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दीं तथा सामाजिक सद्भाव को और मजबूत करने का संकल्प लिया।

इसके बाद गुरु के अटूट लंगर में सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। लंगर के माध्यम से समानता, सेवा और भाईचारे की परंपरा को आगे बढ़ाया गया। कार्यक्रम में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि भविष्य में सिख समाज और कबीर पंथ समाज इसी तरह मिलकर धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में सहभागिता करेंगे, ताकि समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश लगातार मजबूत होता रहे।

कार्यक्रम के अंत में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कवर्धा ने सभी श्रद्धालुओं, समाज प्रतिनिधियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए संयुक्त आयोजन को सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।