बालोद के सिरसिदा स्वास्थ्य केंद्र में बदइंतजामी, प्रसूता के परिजनों को पीना पड़ा बाथरूम का पानी
बालोद जिले के गुंडरदेही तहसील अंतर्गत सिरसिदा आयुष्मान आरोग्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई है। प्रसूता के परिजनों को अस्पताल में पीने का पानी नहीं मिलने पर बाथरूम का पानी पीना पड़ा। ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर अमानवीय व्यवहार और दवाइयों की कमी के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. बालोद जिले के गुंडरदेही तहसील अंतर्गत ग्राम सिरसिदा स्थित आयुष्मान आरोग्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल व्यवस्था और अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। यहां एक प्रसूता महिला और उसके परिजनों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अस्पताल में न तो पर्याप्त स्टाफ मौजूद था और न ही पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध थी। भीषण गर्मी में प्रसूता के परिजनों को मजबूरी में बाथरूम के नल का पानी पीकर प्यास बुझानी पड़ी।
जानकारी के अनुसार शनिवार को एक महिला की डिलीवरी सिरसिदा आयुष्मान आरोग्य केंद्र में हुई थी। प्रसव के बाद महिला और नवजात को अस्पताल में ही रखा गया, लेकिन रविवार को पूरे दिन अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी मरीज की स्थिति देखने नहीं पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कई बार स्टाफ को बुलाने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अस्पताल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं मिली। गर्मी से परेशान परिजनों ने काफी इंतजार किया, लेकिन जब कहीं से पानी उपलब्ध नहीं हुआ तो उन्हें मजबूर होकर अस्पताल के बाथरूम में लगे नल का पानी पीना पड़ा। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया।
रविवार रात जब ग्रामीणों को इस घटना की जानकारी मिली तो बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। नाराज ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल में लंबे समय से अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किए तो अस्पताल प्रभारी ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय उल्टा परिजनों और ग्रामीणों पर ही नाराजगी जताई। आरोप है कि अस्पताल प्रभारी ने लोगों से पूछा कि वे मरीज के कौन हैं और उन्हें इस मामले से क्या लेना-देना है। इस व्यवहार से ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सिरसिदा स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक दवाइयों की भी भारी कमी रहती है। एंटीबायोटिक, डाइक्लोफेनेक, बीपी और शुगर की दवाइयों जैसी सामान्य दवाएं तक अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहतीं। मरीजों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए निजी मेडिकल दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और सीएमएचओ से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में और गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।