प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन 19 मार्च को सीजीसीआई केंद्र, रामपुर में किया गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा की सभापति रूखमणी कौशिक उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. मनोज कुमार गेंदले, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. दुर्गा चैरसिया, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आशीष देवांगन तथा ग्राम रामपुर के सरपंच गोपाल नेताम सहित अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
वैज्ञानिक तकनीकों पर दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान किसानों को यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक निर्माण, संपूर्ण पशु आहार तैयार करने की तकनीक, पशु आहार प्रबंधन और उद्यमिता विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। आयोजन सचिव डॉ. सोनाली पुष्टे के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण का संचालन किया गया।
निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. मनोज कुमार गेंदले ने कम लागत में संतुलित पशु आहार तैयार करने की तकनीकों पर जोर दिया और किसानों को इन नवाचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
सामुदायिक खेती और योजनाओं पर जोर
डॉ. दुर्गा चैरसिया ने सामुदायिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे किसानों को शासकीय योजनाओं का अधिक लाभ मिल सकता है। वहीं डॉ. आशीष देवांगन ने पशुपालकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. वंदना भगत ने डेयरी फार्मिंग में वैज्ञानिक आवास व्यवस्था और बकरी पालन के विकास पर प्रकाश डाला।
डॉ. जितेन्द्र जाखड़ ने मत्स्य प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों से पशु आहार तैयार करने की तकनीक समझाई, जबकि डॉ. राकेश जोशी ने पशुओं में होने वाली बीमारियों की रोकथाम के उपाय बताए।
व्यावहारिक प्रदर्शन से बढ़ी रुचि
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सोनाली पुष्टे द्वारा यूरिया मोलासिस मिनरल ब्लॉक निर्माण का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतिभागियों ने इस तकनीक को अपनाने में रुचि दिखाई।
दूसरे दिन किसानों को संपूर्ण पशु आहार निर्माण की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया और पुनः व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया।
आय बढ़ाने की दिशा में पहल
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को वैज्ञानिक पशु आहार प्रबंधन, कम लागत में उत्पादन और उद्यमिता विकास के प्रति जागरूक करना था। इससे न केवल पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।