सीमावर्ती गांवों में विकास की बदहाली पर राकेश उसेंडी ने उठाए सवाल, स्कूलों में शिक्षक गायब तो झोपड़ी में आंगनबाड़ी
नारायणपुर और कोंडागांव विधानसभा के सीमावर्ती क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा और आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। कावानार में शिक्षक की अनुपस्थिति, झोपड़ी में आंगनबाड़ी संचालन और रसोईया के घर के आंगन में स्कूल संचालित होने की स्थिति सामने आई। तोयामेटा में भी स्कूल भवन और सड़क की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नारायणपुर और कोंडागांव विधानसभा के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की जमीनी स्थिति का जायजा लेने पहुंचे जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, आंगनबाड़ी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। विभिन्न गांवों के निरीक्षण के दौरान सामने आई समस्याओं को लेकर उन्होंने शासन-प्रशासन से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की मांग की।
राकेश उसेंडी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में दो नदियां होने के बावजूद ग्रामीणों की सुविधा के लिए आवश्यक पुल-पुलिया का निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। बरसात के दिनों में नदी और नालों के कारण ग्रामीणों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों को आवागमन में काफी परेशानी होती है। कई स्थानों पर पक्की सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण पगडंडी और कच्चे रास्तों से आवागमन करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों का लगातार दौरा होता रहा है। नारायणपुर विधानसभा के विधायक केदार कश्यप और कोंडागांव विधानसभा की विधायक लता उसेंडी भी क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, इसके बावजूद सीमावर्ती गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है।
कावानार गांव और स्कूल के निरीक्षण के दौरान लंबे समय से शिक्षक के अनुपस्थित रहने की शिकायत सामने आई। राकेश उसेंडी ने कहा कि स्कूल में शिक्षक की नियमित उपस्थिति बच्चों की शिक्षा के लिए बेहद जरूरी है। यदि शिक्षक ही विद्यालय में उपस्थित नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने ऐसी लापरवाही के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
कावानार में स्कूल के बच्चों के लिए दाल-चावल जैसी आवश्यक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। वहीं स्कूल में कार्यरत रसोईया को समय पर मानदेय नहीं मिलने की शिकायत भी निरीक्षण के दौरान सामने आई। इन समस्याओं का तत्काल निराकरण करने की जरूरत बताई गई।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कावानार सहित कुछ क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र झोपड़ीनुमा स्थानों में संचालित हो रहे हैं। वहीं कई वर्षों से रसोईया के घर के आंगन में स्कूल संचालित होने की स्थिति भी सामने आई। राकेश उसेंडी ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। झोपड़ी या जर्जर भवनों में बच्चों की पढ़ाई कराना उचित नहीं है।
तोयामेटा गांव के निरीक्षण में भी सड़क और शिक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला एक ही स्थान पर संचालित हो रही हैं। स्कूल भवन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त बताया गया, जबकि छत की स्थिति भी खराब होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। यहां शिक्षक की अनुपस्थिति को लेकर भी नाराजगी सामने आई।
राकेश उसेंडी ने कहा कि नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के बावजूद सीमावर्ती गांवों में विकास की बुनियादी सुविधाएं अब भी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को पक्की सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी भवन और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। कई परिवारों के झोपड़ीनुमा मकानों में रहने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि सीमावर्ती और अंदरूनी क्षेत्रों को प्राथमिकता में रखते हुए सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल और आंगनबाड़ी भवन सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ बच्चों को समय पर मध्यान्ह भोजन और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए।
राकेश उसेंडी ने कहा कि जनता का हक जनता तक पहुंचना चाहिए और बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने शासन-प्रशासन से सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं का गंभीरता से संज्ञान लेकर जल्द समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।