इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक ने बयान जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ हमेशा से आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की मिसाल रहा है। ऐसे राज्य में धर्म के नाम पर छोटे व्यापारियों और मेहनतकश लोगों के साथ मारपीट किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव या हिंसा न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि यह सीधे-सीधे संविधान और कानून का उल्लंघन भी है।
मोहम्मद सिद्दीक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ असामाजिक तत्व अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समाज में नफरत और वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएं प्रदेश की शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाती हैं और आम नागरिकों में भय का वातावरण पैदा करती हैं।
उन्होंने प्रशासन और राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि देवबलोदा तथा राजिम क्षेत्र में सामने आई इन घटनाओं की निष्पक्ष और त्वरित जांच की जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देने का साहस न कर सके।
सिद्दीक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार द्वारा इन असामाजिक तत्वों पर प्रभावी और कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो कांग्रेस असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ प्रदेशभर में उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि गरीब, छोटे व्यापारी और ठेला-गुमटी चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले लोग पहले ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, ऐसे में उनके साथ इस तरह का व्यवहार अत्यंत पीड़ादायक है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रदेश में शांति, सद्भाव और कानून व्यवस्था को बनाए रखना है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर सामाजिक समरसता और आपसी विश्वास पर पड़ेगा।
अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रामक संदेशों और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों से दूर रहें तथा आपसी भाईचारे और सौहार्द को बनाए रखने में सहयोग करें।