सड़क निर्माण की आड़ में पेड़ों की कटाई, जगह-जगह बचे केवल ठूंठ – कोंडागांव में उठे सवाल
कोंडागांव जिले में जूनापानी से नेवता तक निर्माणाधीन सड़क के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्य के नाम पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी हो रही है। प्रशासन से अनुमति प्रक्रिया, कटे पेड़ों की संख्या और प्रतिपूरक वृक्षारोपण की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA .रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव | कोंडागांव जिले के अंदरुनी और दूरस्थ गांवों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के उद्देश्य से इन दिनों सड़क निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि, इस विकास कार्य के साथ-साथ पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। सड़क निर्माण की आड़ में सैकड़ों पेड़ों की कटाई किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार कोंडागांव जिला अंतर्गत जूनापानी से नेवता तक निर्माणाधीन सड़क की जद में आने वाले बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया गया है। कई स्थानों पर पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर हटाया गया है। कटाई की जद में आए पेड़ों में साल, आम, बरगद सहित अन्य मिश्रित प्रजातियों के पेड़ शामिल बताए जा रहे हैं। सड़क किनारे जगह-जगह दिखाई दे रहे कटे हुए पेड़ों के ठूंठ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि विकास कार्य के दौरान पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी की जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है, लेकिन बिना पारदर्शी अनुमति प्रक्रिया और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के की जा रही पेड़ कटाई चिंता का विषय बन चुकी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण के लिए लिए गए अनुमति पत्र, काटे गए पेड़ों की वास्तविक संख्या और प्रस्तावित प्रतिपूरक वृक्षारोपण की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
पेड़ कटाई को लेकर क्या कहता है नियम
वन मंडलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए पेड़ कटाई को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन निर्धारित है। यदि सड़क निर्माण से एक हेक्टेयर से कम वन क्षेत्र प्रभावित होता है, तो अनुमति डीएफओ स्तर से दी जाती है। वहीं यदि पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र प्रभावित होता है, तो अनुमति राज्य शासन से ली जाती है। इसके अलावा, यदि पांच हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र प्रभावित होता है, तो केंद्र सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
इन नियमों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जूनापानी से नेवता सड़क निर्माण के लिए कितने क्षेत्र में पेड़ कटाई की अनुमति ली गई है और किस स्तर से स्वीकृति प्रदान की गई है। यही कारण है कि ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों के बीच असमंजस और नाराजगी दोनों बनी हुई है।
लोक निर्माण विभाग ईई ने क्या कहा
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग, छत्तीसगढ़ के कार्यपालन अभियंता ए.आर. मरकाम ने बताया कि कोंडागांव जिला अंतर्गत ग्राम जूनापानी से नेवता तक सड़क निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा एक ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा तय प्रक्रिया के तहत कार्य किया जा रहा है।
हालांकि, मौके की स्थिति और बड़ी संख्या में कटे पेड़ों को देखकर ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविकता और कागजी प्रक्रिया में अंतर दिखाई दे रहा है। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग स्वयं मौके पर निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करे और यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच कब तक पूरी करता है और पर्यावरण को हुए नुकसान के लिए जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाती है, ताकि भविष्य में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।